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बच्चों-महिलाओं से जुड़े अपराधों पर अंकुश लगाएगी पुलिस

पुलिस अधीक्षक ने कहा-नशे के खिलाफ चलाएंगे सशक्त अभियान

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बच्चों-महिलाओं से जुड़े अपराधों पर अंकुश लगाएगी पुलिस

बच्चों-महिलाओं से जुड़े अपराधों पर अंकुश लगाएगी पुलिस

श्रीगंगानगर. बच्चों और महिलाओं से जुड़े अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस मुस्तैदी से कार्य करेगी। ऐसे अपराधों को रोकने के लिए आमजन को भी जागरुकता का परिचय देते हुए पुलिस का सहयोग करना होगा। कार्यभार ग्रहण करने के बाद पहली बार मीडिया से रूबरू हुए शर्मा ने जिले में नशे के बढ़ते प्रचलन पर चिंता जताते हुए कहा कि नशे के खिलाफ पहले से चल रहे अभियान को और गति दी जाएगी।

उन्होंने कहा कि सभ्य समाज में बच्चों और महिलाओं के खिलाफ अपराध में हो रही बढ़ोतरी चिंताजनक है। अपराध के कारण अलग-अलग हो सकते हैं। लेकिन अपराध तो अपराध ही है। इसे रोकने में आमजन की भागीदारी जरूरी है। बच्चों और महिलाओं के खिलाफ अपराध की बहुत सी घटनाएं तो पुलिस तक पहुंचती ही नहीं।

आमजन भी ऐसी घटनाओं को देखकर अनदेखी कर देते हैं, जिससे बड़ी घटना घटित हो जाती है। बच्चों और महिलाओं से जुड़े़ अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए अब पुलिस आमजन का सहयोग लेगी। कोई भी नागरिक ऐसे अपराध की सूचना पुलिस को देकर पीड़ित पक्ष की मदद कर सकता है।

नशे के बढ़ते प्रचलन के बारे में पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जिला पुलिस नशे के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है। उस अभियान को जारी रखते हुए और गति लाई जाएगी। उन्होंने कहा कि इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, इसलिए पुलिस का फोकस कानून व्यवस्था बनाए रखने पर भी रहेगा।

अनुभवी चिकित्सकों के बगैर गांवों में खुले मेडिकल स्टोर पर बिक रहे मेडिकेटेड नशे के सवाल पर पुलिस अधीक्षक का कहना था कि नशे के मामले में पुलिस एनडीपीएस एक्ट में कार्रवाई करती है। मेडिकल स्टोर पर नशे के रूप में प्रयुक्त होने वाली जो भी दवा बेची जाती है, वह इस एक्ट में नहीं आती। फिर भी जिला कलक्टर व चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के साथ विचार विमर्श कर कोई गाइड लाइन तय कर इस नशे के खिलाफ सशक्त अभियान चलाया जाएगा।

साइबर क्राइम पर काम

साइबर क्राइम की रोकथाम के बारे में पुलिस अधीक्षक का कहना था कि इसे रोकने के लिए साइबर थाना खुल गया है। साइबर क्राइम में विशेषज्ञ स्टाफ की नियुक्ति भी हो चुकी है। साइबर क्राइम करने वाले शातिर हैं और नित नए तरीके इजाद करते हैं, सो जनता को भी जागरूक होने की जरूरत है।

अगर किसी के साथ फ्राड होता है तो इसके लिए हेल्पलाइन नंबर है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि किसी के साथ एक लाख रुपए से अधिक का फ्राड हुआ है तो उसका मामला साइबर थाने में दर्ज होता है जबकि फ्राड की राशि एक लाख रुपए से कम हो तो इसका मामला संबंधित थाने में दर्ज होती है।

पीजी को खंगालेंगे

शहर के ब्लॉक एरिया में खुले पीजी में छात्र के रूप में अपराधी तत्वों के रहने के सवाल पर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि पीजी में रहने वालों का वेरीफिकेशन करवाया जाएगा। आपराधिक गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार के बारे में उनका कहना था कि यातायात व्यवस्था में सुधार अकेले पुलिस के बूते में नहीं। प्रशासन, परिवहन विभाग और नगर परिषद के सहयोग से इसमें सुधार किया जाएगा।

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