सलोन विधानसभा सीट रायबरेली की पुरानी सीटों में शुमार है। इस सीट पर पहली बार आजादी के बाद 1957 में चुनाव हुआ था। उस दौरान यह सीट कांग्रेस की रही। यहां कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता चौहान विधायक बनीं। 1962 में यहां से एसओसी के पितई को जीत मिली। इसी तरह से 1967 में फिर से कांग्रेस प्रत्याशी डीबी सिंह जीते। 1969 में एसएसपी ने शिवप्रसाद पांड्या का इस सीट पर परचम लहराया तो 1974 में बीकेडी और 1977 में यह सीट जनता पार्टी की झोली में गई।
प्रमुख समस्याएं सलोन विधानसभा क्षेत्र सबसे प्रमुख समस्या रोजगार की है। यहां रोजगार के साधन नहीं होने के कारण युवा शहरों का रुख कर रहे हैं। रायबरेली के साथ इस पर भी पेयजल गंभीर समस्या है। ग्रामीण क्षेत्र के किसान सिंचाई के साधन नहीं होने के चलते परेशान हैं। हालांकि शारदा सहायक ने इस समस्या को कुछ हद तक कम करने का प्रयास जरूर किया है, लेकिन किसानों की बड़ी आबादी आज भी अभी अभाव में जीने को मजबूर है। इसके साथ ही क्षेत्र की सड़कों की स्थिति बेहद दयनीय है।
कांग्रेस नेता चार बार लगातार रहे विधायक सलोन सीट पर लंबे समय तक कांग्रेस का कब्जा रहा है। कांग्रेस नेता शिवबालक पासी 1980, 1985, 1989 और 1991 के चुनाव में लगातार इस सीट से विधायक चुने गए। इसके बाद 1993 और 1996 में यह सीट भाजपा की झोली में चली गई। यहां से दल बहादुर कोरी जो भाजपा के प्रत्याशी थे, विधायक चुने गए। 2002 में यह सीट सपा प्रत्याशी के हाथों चली गई। यहां से सपा प्रत्याशी आशा किशोर विधायक बनीं। 2017 में एक बार फिर इस सीट से दल बहादुर विधायक बने। उन्होंने भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़ा। दल बहादुर सिंह का हाल ही में कोरोना वायरस की वजह से मृत्यु हो गई।
2017 का चुनाव परिणाम – भाजपा प्रत्याशी दल बहादुर को 78028 मत मिले। – कांग्रेस प्रत्याशी सुरेश चौधरी को 61973 मत मिले। – बसपा प्रत्याशी ब्रजलाल पासी को 39851 मत मिले।
– इस सीट पर 2017 में जीत का अंतर 16055 मतों का रहा। 2012 का चुनाव परिमाण – सपा प्रत्याशी आशा किशोर को 69020 मत मिले। – कांग्रेस प्रत्याशी शिवबालक पासी को 48443 मत मिले।
– बसपा प्रत्याशी विजय अंबेडकर को 23069 मत मिले। – भाजपा प्रत्याशी दल बहादुर को 18959 मत मिले। – इस सीट पर जीत का अंतर 20577 रहा।