परमात्मा को अपना बनाने के बाद जीवन में कुछ शेष नहीं रह जाता-बीके लक्ष्मी
तीन दिवसीय प्रवचनमाला का हुआ समापन, योग, ध्यान करने किया प्रेरित
कार्यक्रम में सजाई गई झांकी
बीना. यदि भगवान से कुछ मांगना हो, तो उसे ही मांग लें। क्योंकि परमात्मा को अपना बनाने के बाद जीवन में कुछ शेष नहीं रह जाता है। अपने जीवन की असली पूंजी ईश्वर की याद है। एक बार परमात्मा से सर्व संबंधों का अनुभव करके देखें। यह बात उमरिया से आईं मुख्य वक्ता राजयोगिनी लक्ष्मी ने ब्रह्माकुमारीज के खिमलासा सेवाकेन्द्र की ओर से आयोजित तीन दिवसीय राजयोग प्रवचनमाला के समापन अवसर पर कही।
उन्होंने कहा कि परमात्मा को अपने हर कर्म में शामिल करके देखें, दुनिया में ऐसा सच्चा साथी, सच्चा दोस्त दूसरा कोई हो नहीं सकता है। इस दौरान उन्होंने लगन तुमसे लगा बैठे, बस और मिले नहीं भगवान प्यारे गुरु के बिना सतगुरु के बिना, दुनिया में सबसे प्यार से चलना सीखो गीतों की प्रस्तुति से समां बांध दिया। बीना सेवाकेंद्र प्रभारी बीके सरोज ने कहा कि परमात्मा शक्तियों का दाता है। हम उनकी संतान उनका स्वरूप अर्थात वह सागर हैं, तो हम उसके स्वरूप हैं। खुरई सेवाकेंद्र प्रभारी बीके किरण ने कहा कि परमात्मा को अपना बनाने से जीवन बदल जाता है। ब्रह्माकुमारीज में नहीं बल्कि हजारों लोगों के अनुभव हैं कि कैसे उनका जीवन योग से बदल गया। खिमलासा सेवाकेंद्र प्रभारी बीके जानकी ने कहा कि आत्मा का कल्याण परमात्मा की याद से ही हो सकता था। इस अवसर पर राजकुमार लोधी, नारायण प्रसाद चौरसिया, इमरत साहू आदि उपस्थित थे।
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