विगत तीन दिनों से संक्रमित मरीजों के बैग की तलाशी ली जा रही है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि संक्रमित मरीज के परिजनों को कई बार सूचना देने के बाद भी सामानों को ले जाने के लिए नही आए तो उसे नष्ट किया जा रहा है। काफी दिनों से सामानों को संभालकर एक कमरे में रखा गया था। कमरा पूरा भर गया था, जिसकी वजह से खाली किया जा रहा है। मार्च-2020 से अब तक एम्स में 9000 से ज्यादा रोगियों को COVID-19 के इलाज के लिए भर्ती किया जा चुका है। इसमें से 7812 से अधिक रोगी ठीक होकर घर जा चुके हैं।
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400 से ज्यादा की मौत भी हुई है। एम्स से डिस्चार्ज तथा मरने वालों के बहुत से परिजन उनके बैग में रखे सामानों को छोड़कर चले गए थे। अस्पताल प्रबंधन ने बैग पर मरीज का नाम लिखकर एक कमरे में रखवा दिया था। इसमें कई लावारिस बैग भी थे। अस्पताल प्रबंधन ने बैग ले जाने के लिए परिजनों को कई बार सूचना दी, लेकिन नही आए। बैग और सामानों से कमरा पूरी तरह से भर गया था, जिसे अब खाली किया जा रहा है।बैग की तलाशी की वीडियो रेकॉर्डिंग
एम्स के कर्मचारी एक-एक बैग की तलाशी ले रहे हैं, जिसमें से अब तक सोने-चांदी के आभूषण, 50 के करीब मोबाइल, रेमडेसिविर, नए कपड़े, चादर-कबल, बर्तन फल, बिस्किट, मिठाई आदि निकले हैं। सामान की तलाशी के पूरी वीडियो रेकार्डिंग की जा रही है, ताकि कभी मरीज के परिजन आएं तो चोरी का आरोप न लगा सके। एक-एक सामान की लिस्ट भी तैयार की जा रही है। एक-एक बैग से क्या-क्या सामान निकला है, इसका पूरा ब्यौरा तैयार हो रहा है।
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नए कपड़े पहनने का नहीं मिला मौका
सामान की तलाशी ले रहे कर्मचारियों ने बताया कि ज्यादातर उनके बैग हैं, जिनकी कोरोना से मौत हो चुकी है। अधिकतर बैगों से नए-नए कपड़े मिले हैं। मरीजों को उम्मीद थी कि एम्स से ठीक होने के बाद नए कपड़े पहनकर अपने घर जाएंगे, लेकिन मौका नही मिला। घर से निकलते समय मरीज खाने के सामान बिस्किट, मिठाई, फल आदि लेकर भी आए थे, जो बैग में ही पड़ा का पड़ा रह गया। गले, नाक और कान में पहनने वाले सोने के आभूषण, चांदी की पायल आदि भी मिले हैं। कई बैगों से रेमडेसिविर इंजेक्शन भी मिला है।