scriptपत्रकार Jovita Idar ने मैक्सिकन-अमरीकी नागरिकों के समान अधिकारों के लिए लड़ी लंबी लड़ाई | Journalist Jovita Idar fought equal rights for Mexican-American citizens | Patrika News
विविध भारत

पत्रकार Jovita Idar ने मैक्सिकन-अमरीकी नागरिकों के समान अधिकारों के लिए लड़ी लंबी लड़ाई

पत्रकार Jovita Idar ने मैक्सिकन-अमरीकी के समान अधिकारों के लिए किया संघर्ष
अपनी पत्रकारिता प्रतिभा के दम पर रेंजरों से भी भिड़ गईं निडर जोविता
जोविता ने मैक्सिकन क्रांति के दौरान संयुक्त राज्य अमरीका के सैन्य हस्तक्षेप की कड़ी निंदा की

Sep 22, 2020 / 11:11 am

धीरज शर्मा

Journalist Jovita Idar

साहसी पत्रकार जोविता इदर

नई दिल्ली। दुनियाभर में मौजूदा समय में नस्लवाद और विदेशी नागरिकों के प्रति नफरत के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। हालांकि इतिहास गवाह है जब-जब इस तरह के मसले सामने आए साहसी लोगों ने आगे बढ़कर इस तरह की मानसिकता को हराते हुए इतिहास में अपना नाम अंकित किया। ऐसे ही लोगों में शुमार हैं मैक्सिकन पत्रकार जोविता इदर ( Jovita Idar )। जिन्होंने मैक्सिकन-अमरीकी नागरिकों के अधिकारों के लिए अपनी रिपोर्टिंग्स के जरिए लंबी लड़ाई लड़ी।
इसके साथ ही मैक्सिकन महिला लीग की अध्यक्ष के रूप में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण रही। महिला लीग के लिए वे एक भावुक वक्ता के साथ-साथ वकील के तौर पर भी खड़ी रहीं। इदर ने अपने साथियों की वकालत करने के लिए अपनी प्रतिभाओं का पूरा इस्तेमाल किया, हालांकि कई बार उन्हें गंभीर परिणामों से भी गुजरना पड़ा।
तेजी से बढ़ रहा है चक्रवाती तूफान नोल, देश के इन राज्यों में अगले कुछ घंटों में होगी जोरदार बारिश, जानें अपने इलाके का हाल

1914 में, एल प्रोग्रेसो अखबार के लिए लिखते और रिपोर्ट करते समय इदर ने एक संपादकीय लिखा, जिसमें उन्होंने मैक्सिकन क्रांति में संयुक्त राज्य अमरीका के सैन्य हस्तक्षेप की निंदा की। जवाबी कार्रवाई में, अखबार के मुख्यालय का दौरा टेक्सास रेंजर्स के एक बेड़े द्वारा किया गया था, जिसने प्रकाशन को बंद करने की मंशा जाहिर की।
इसके जवाब में इदर ने कुछ ऐसा किया जो इतिहास के पन्नों में भी दर्ज हो गया। वह अपने दफ्तर एल प्रोग्रेसो के कार्यालयों के बाहर खड़ी हो गईं, जब रेंजर इस दफ्तर को बंद करने या तोड़ने के इरादे से आए तो उनके रास्ते में जोविता इदर चट्टान बनकर खड़ी हो गईं।
goo.jpg
बिहार की राजनीति में हो रहा है बड़ा बदलाव, इतिहास में पहली बार राजद के पोस्टरों से गायब हुए लालू प्रसाद यादव, जानें क्या है इसके पीछे की रणनीति

हाल में गूगल ने अपने डूडल में जोविता के इसी रूप को दिखाया। इदर के इस साहस के आगे रेंजरों के हौसले पस्त हो गए और उन्हें अपना मिशन छोड़ना पड़ा।
मैक्सिकन-अमरीकी महिलाओं के लिए समान अधिकारों में उनके विश्वास के रूप में भाषण की स्वतंत्रता के लिए इदर के दोहरे जुनून और उन्होंने सीधे कार्रवाई और अथक काम के माध्यम से अपने जुनून को प्रसारित किया।
हालांकि एल प्रोग्रेसो के कार्यालयों और प्रिंटिंग प्रेसों को अंततः रेंजरों द्वारा तोड़ दिया गया था। लेकिन इससे इदर के साहस में कोई कमी नहीं आई और उन्होंने आगे भी इसके खिलाफ लिखना जारी रखा।
वह अपने पिता के स्वामित्व वाले अखबार ला क्रोनिका में कहानियां प्रकाशित करती रहीं और आखिरकार अपने भाइयों के साथ प्रकाशन की कमान संभाली।

1946 में अपनी मृत्यु तक अपने शेष जीवन के लिए, उन्होंने नागरिक अधिकारों और समानता की अपनी इच्छा को पूरा करने के लिए स्वतंत्र प्रेस का उपयोग किया और सरकारी दमन को सभी के लिए बेहतर भविष्य देखने की उनकी इच्छा को कम नहीं होने दिया।

Hindi News / Miscellenous India / पत्रकार Jovita Idar ने मैक्सिकन-अमरीकी नागरिकों के समान अधिकारों के लिए लड़ी लंबी लड़ाई

ट्रेंडिंग वीडियो