इधर गर्मी का पारा चढ़ रहा है उधर रिहंद का कंठ सूख रहा है।छत्तीसगढ़ के गर्भ से निकलने वाली रेणुका नदी पर बनाये गए रिहंद बांध जलाशय,जिसे गोविन्द वल्लभ पंत जलाशय भी कहते हैं,आने वाले समय में आधे भारत के लिए गंभीर ऊर्जा संकट की वजह बन सकता है।दुर्भाग्य यह है कि जिन बिजलीघरों के कारण रिहंद का पानी विषाक्त हुआ अब उन्हीं बिजलीघरों के लिए रिहंद का विषाक्त पानी भी सूखने लगा है।लगभग 20,000 मेगावाट क्षमता के बिजलीघरों के लिए प्राणवायु कहे जाने वाले रिहंद बाँध की स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि अगर आगामी मानसून की स्थिति में थोडा सा भी परिवर्तन हुआ,तो रिहंद के पानी पर निर्भर बिजलीघरों में उत्पादन ठप्प हो सकता है।