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गुस्से में हैं शेखावाटी की वीरांगनाएं

कहा, सरकार शहीद स्मारकों की सुरक्षा नहीं कर सकती, इसलिए अब घर में ही बनाएंगे स्मारक

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गुस्से में हैं शेखावाटी की वीरांगनाएं

गुस्से में हैं शेखावाटी की वीरांगनाएं

सीकर. पहले तो शहीद स्मारकों को बनाने के लिए कड़ी दौड़ धूप...इस पर सिरफिरों की करतूत! शेखावाटी की वीरांगनाएं गुस्से में हैं। अभी हाल ही में लक्ष्मणगढ़ के रहनावा में करगिल शहीद लांसनायक दयाचंद जाखड़ की प्रतिमा का सिर ही धड़ से अलग कर दिया गया। हालांकि यह करतूत सिरफिरे की थी, लेकिन शहीद के परिजन इससे खासे आहत हुए। बकौल वीरांगना...मेरे पति लांस नायक दयाचन्द जाखड़ पहले करगिल युद्ध के दौरान शहीद होकर देश के काम आए और अब गांव में बने स्मारक पर गांव के काम आ गए है। अब मैं उनका स्मारक किसी सार्वजनिक स्थान पर नहीं बल्कि अपने घर पर ही लगाना चाहती हूं ताकि उसकी सुरक्षा तो बनी रहे। करगिल विजय दिवस पर क्षेत्र के करगिल शहीद लांस नायक दयाचन्द जाखड़ की वीरांगना विमला देवी का दर्द कुछ यूं उभर कर सामने आया। पत्रिका से बातचीत में उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि शहीद प्रतिमा को खण्डित करने के दो आरोपियों में से एक को तो पुलिस ने विक्षिप्त बताकर गिरफ्तार ही नहीं किया और दूसरे को इस प्रकार का मामला बनाकर गिरफ्तार किया कि उसकी अगले दिन ही जमानत हो गई। शहीद वीरांगना ने कहा कि उनके पति के शहीद होने के बाद उन्हें काफी संघर्ष करना पड़ा। एक पुत्र भी दुर्घटना में मौत का शिकार हो गया। जैसे-तैसे करके दूसरे पुत्र को पढ़ाया लिखाया और पाला है। शहीद के स्मारकों की सुरक्षा सरकार और प्रशासन नहीं कर सकते तो वह उनका स्मारक अब अपने घर पर ही बनवाना चाहती है जिससे कि उसकी सुरक्षा बनी रहे। शहीद दयाचन्द के अनुराग ने पत्रिका को बताया कि देश के लिए अपनी जान बलिदान करने वाले शहीदों के स्मारकों को तोडऩा अत्यन्त दुखद है। सरकार को भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकनी चाहिए। विमला देवी ने कहा कि बतौर शहीद की पत्नी उनकी सरकार से एक ही मांग है कि उनके एकमात्र पुत्र को सरकारी नौकरी दे दी जाए।


ऑपरेशन विजय में हुए थे शहीद
रहनावा के लांस नायक दयाचन्द जाखड़ 18 नवंबर 1987 को जाट रेजीमेंट में भर्ती हुए थे। ऑपरेशन विजय (करगिल युद्ध) के दौरान शत्रुओं से वीरतापूर्वक लड़ते हुए 12 अगस्त 1999 को वे शहीद हो गए थे। रहनावां गांव के राजकीय विद्यालय में शहीद जाखड़ का स्मारक बनाया हुआ है, जहां 21 जुलाई को उनकी प्रतिमा का खण्डित कर दिया गया। मामले में पुलिस ने एक रिटायर्ड पुलिसकर्मी को गिरफ्तार किया था, जिसे बाद में जमानत पर छोड़ दिया गया जबकि दूसरे आरोपी को पुलिस ने मानसिक विक्षिप्त बताकर गिरफ्तार ही नहीं किया।


सख्त कानून बनाए सरकार
शहीद दयाचन्द जाखड़ की वीरांगना विमला देवी ने बताया कि संभवतया देशभर में शहीद की प्रतिमा को खण्डित करने का यह पहला मामला है और कानून सख्त न होने के कारण आरोपी को दूसरे ही दिन जमानत भी मिल गई। वीरांगना ने सरकार से मांग की है कि शहीदों की प्रतिमाओं की सुरक्षा को लेकर कड़ा कानून बनाया जाए।