15 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika LogoSwitch to English
home_icon

होम

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

बाघ के बाद नौरादेही में आएंगे अफ्रीकन चीते, घांस का मैदान हुआ तैयार

विटनेरी अस्पताल के लिए नौरादेही डीएफओ ने भेजा प्रस्ताव, चीता आने के पहले ही कर ली गई है लगभग पूरी तैयारी।  

2 min read
Google source verification
Nauridehi Sanctuary will come from African panther

Nauridehi Sanctuary will come from African panther

सागर. प्रदेश के सबसे बड़ा नौरादेही अभयारण्य में अफ्रीकन चीतों को लाने का मसौदा अब साकार होता नजर आ रहा है। इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन ऑफ नेचर (आइयूसीएन) की मंजूरी के बाद अब उम्मीदें और ज्यादा बढ़ गई है। सेंचुरी के अधिकारियों का कहना है कि यदि सुप्रीम कोर्ट राष्ट्रीय बाघ प्राधिकरण मप्र (एनटीसीए) की अपील पर चीतों को लाने की अनुमति देता है तो नौरादेही अभयारण्य पूरी तरह तैयार है। चूंकि चीतों का बसेरा घांस के मैदानों में होता है इसके लिए अभयारण्य में करीब 400 वर्ग किलो मीटर में फैला घांस का वन भी गांव के विस्थापन के बाद खाली हो चुका है। यानी लगभग पन्ना टाइगर रिजर्व (450 वर्ग किमी) के बराबर का घांस का मैदान चीतों के लिए खाली कराया गया है।

छह-आठ साल पहले तैयार हुआ था मसौदा
जानकारी के अनुसार नौरादेही अभयारण्य में अफ्रीकन चीतों को लाने का मसौदा करीब छह-आठ साल पहले तैयार किया गया था। इसके लिए करीब तीन हजार करोड़ रुपए का प्रस्ताव तैयार किया गया था, जिसमें अभयारण्य के बीच बसे गांवों को विस्थापन करने पर व्यय सहित अन्य व्यवस्थाएं बनाने के बिंदु शामिल थे। प्रस्ताव तैयार करते समय तो 23 गांव को विस्थापित करने का प्लान किया था, लेकिन धीरे-धीरे इनकी संख्या 37 पर पहुंच गई है और अब तक 10 गांवों का पूरी तरह से विस्थापन भी हो चुका है।

विशेषज्ञों की टीम कर रही अध्ययन
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार नौरादेही में बाघ, चीतों का बसेरा बनाने को लेकर करीब 15 से 18 वाइल्डलाइफ वैज्ञानिक अध्ययन कर रहे हैं। इसमें जलवायु परिवर्तन के असर, बायोडायवर्सिटी को लेकर समय-समय पर फीडबैक देते रहते हैं।

यह हुई व्यवस्थाएं
नौरादेही अभयारण्य में बीते कुछ सालों में वन व वन्य प्राणियों की सुरक्षा को लेकर कई इंतजाम किए गए हैं। यही कारण है कि यहां पर बाघों का बसेरा बन सका है। सेंचुरी की टीम ने यहां पर कैमरे फिट किए हैं, तो शिकारियों और वन माफियाओं का पर सिकंजा कसने डॉग स्कावड काम कर रही है। इतना ही नहीं वन क्षेत्र में सतत निगरानी के लिए यहां पर ड्रोन का उपयोग होगा।

हम तैयार हैं
हमें फिलहाल विटनेरी हास्पिटल की जरूरत है इसको लेकर करीब तीन-चार माह पहले प्रस्ताव भी भेज दिया गया है। अफ्रीकन चीतों के लिए वन विभाग की टीम और सेंचुरी पूरी तरह तैयार हैं। सुरक्षा से लेकर चीतों के रहने के लिए करीब ४०० वर्ग किमी घांस का मैदान भी खाली हो चुका है।
डॉ. अंकुर अवधिया, डीएफओ, नौरादेही अभयारण्य