उल्लेखनीय है कि कोडिन कफ सिरप का इस्तेमाल कई लोग नशा करने के लिए कर रहे हैं, जिससे इसकी खपत बढ़ गई है और इसमें अधिक मुनाफा देखकर कई मेडिकल दुकान वाले इसे बेच रहे हैं। तिरुपति फार्मा से पुलिस ने 50 पेटी कोडिन कफ सिरप जब्त किया था। पहली बार पुलिस ने किसी बड़े मेडिकल कारोबारी को इस मामले में जेल भेजा है। कफ सिरप की सप्लाई रायपुर के लोकल कारोबारियों के अलावा दुर्ग-भिलाई, आरंग, महासमुंद, बलौदाबाजार जैसे छोटे शहरों और नगरों में भी सप्लाई की गई है।
लॉकडाउन के बाद बढ़ी मांग
लॉकडाउन लगने के बाद से कफ सिरप की मांग बढ़ गई थी। लॉकडाउन के चलते शराब दुकानें बंद हो गई। शराब दुकान बंद होने के बाद से अचानक कफ सिरप की मांग बढ़ गई थी। अधिकांश नशेड़ी कफ सिरप और गांजा का इस्तेमाल करने लगे। सवा सौ रुपए का कफ सिरप भी दो सौ रुपए में बिकने लगा था। दरअसल खांसी के उपचार में इस कफ सिरप का उपयोग किया जाता है, लेकिन एल्कोहल की मात्रा अधिक होने के कारण इसके सेवन से नशा होने के कारण ही नशेड़ी इसका इस्तेमाल करने लगे हैं।
बिना डॉक्टर की अनुमति के बेचते हैं
कोडिन कफ सिरप डॉक्टरों की बिना अनुमति के नहीं बेचा जाता है। इसके लिए डॉक्टर की पर्ची की आवश्यकता होती है, लेकिन कई मेडिकल दुकान संचालक बिना पर्ची के ही इसे बेचते हैं। केवल कफ सिरप का दोगुना रेट लेते हैं। कफ सिरप स्लम इलाकों में धड़ल्ले से बेचा जाता है। कई हिस्ट्रीशीटर इस धंधे में लगे हुए हैं। हालांकि पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार करके जेल भी भेजा है।