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नवविवाहिता ने मौत के बाद अंगदान से बचाई 4 लोगों की जान

30 वर्षीय नवविवाहिता की ब्रेन हेमरेज से मौत के बाद परिवार ने दूसरों की जिंदगी रोशन करने का परोपकारी कदम उठाते हुए अंगदान का निर्णय लिया।

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इंदौर. शहर में २२ माह में २६वां केडेवर आर्गन ट्रांसप्लांट हुआ। ३० वर्षीय नवविवाहिता की ब्रेन हेमरेज से मौत के बाद परिवार ने दूसरों की जिंदगी रोशन करने का परोपकारी कदम उठाते हुए अंगदान का निर्णय लिया। दिल मुंबई के लिए विमान से भेजा गया, वहीं लिवर और दो किडनी इंदौर में प्रत्यारोपित हुई।

महालक्ष्मी नगर निवासी हर्षिता (३०) पति रघुवंश कुशवाह को २८ जुलाई को ब्रेन हेमरेज होने पर बांबे हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। गत दिसंबर में ही हर्षिता की शादी सॉफ्टवेअर इंजीनियर रघुवंश से हुई थी। पिता रविंद्रसिंह ठाकुर भोपाल में वन विभाग अधिकारी हैं। हर्षिता को बुधवार शाम ७.३४ बजे पहली और गुरुवार तड़के ४.१५ बजे दूसरी बार ब्रेन डेड घोषित किया था। परिवार की रजामंदी के बाद अंगदान के लिए इंदौर सोसायटी फॉर आर्गन डोनेशन से अनुमति और वेटिंग लिस्ट के हिसाब से प्रक्रिया शुरू हुई। तकनीकी कारणों से दोपहर की बजाए शाम को ग्रीन कॉरिडोर बन पाए। शाम ६.१९ बजे पहला ग्रीन कॉरिडोर बांबे हॉस्पिटल से एयरपोर्ट तक के लिए बना। १२ मिनट में हार्ट एयरपोर्ट पहुंचा और फ्लाइट से कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल मुंबई पहुंचा। लिवर शाम ७ बजे मेदांता अस्पताल रवाना किया, वहीं एक किडनी बांबे हॉस्पिटल में ही प्रत्यारोपित की गई।

फोन पर काउंसलिंग
ब्रेनडेड घोषित करने के दो दिन पहले स्थिति को देखते हुए अस्पताल के कॉर्डिनेटर अमित नानावने ने मुस्कान ग्रुप को सूचना दी। सेवादार जीतू बागानी, संदीपन आर्य, डॉ. रेनू जयसिंघानी, राजेंद्र माखीजा व लक्की वाधवानी अस्पताल पहुंचे। काउंसलिंग के बाद रघुवंश ने अंगदान की हामी भरी, लेकिन अंतिम फैसला हर्षिता के पिता रविंद्रसिंह और मां नीता ठाकुर पर छोड़ दिया। फोन पर चर्चाकर उन्हें तैयार किया, भोपाल से आकर उन्होंने रजामंदी दी।

गौरतलब है कि अंगदान में इंदौर लगातार इतिहास रच रहा है और हर्षिता ने भी उसमें एक नई मिसाल कायम करके लोगों को इसके प्रति जागरूक करने में अनुकरणीय भूमिका अदा की है। हर्षिता जैसे उदाहरण ही समाज में अंगदान के प्रति लोगों को जागरूक करेंगे और भविष्य में इनकी वजह से कई लोगों के जीवन बचाए जा सकेंगे।