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हनुमानगढ़

Hanumangarh News : अब जनप्रतिनिधि नहीं अफसर चलाएंगे शहरी सरकार, गाइडलाइन का बेसब्री से इंतजार

Hanumangarh News : नगर परिषद बोर्ड का कार्यकाल पूरा हो चुका है। ऐसे में नगर परिषद हनुमानगढ़ में प्रशासक किसे बनाया जाए, यह सवाल है। इस वक्त हर किसी को राजस्थान सरकार की गाइडलाइन का बेसब्री से इंतजार है।

हनुमानगढ़Nov 19, 2024 / 06:45 pm

Sanjay Kumar Srivastava

Hanumangarh Now Officers Run Urban Government not Public Representatives Rajasthan Government Guidelines Waiting
Hanumangarh News : हनुमानगढ़ नगर परिषद बोर्ड के कार्यकाल को आज पांच वर्ष पूर्ण हो चुके हैं। आज के ही दिन 2019 में निकाय चुनाव के परिणामों की घोषणा हुई थी। ऐसे में नगर परिषद हनुमानगढ़ में प्रशासक किसे लगाया जाता है। हर किसी को राजस्थान सरकार की गाइडलाइन का बेसब्री से इंतजार है। 2019 में राज्य निर्वाचन आयोग राजस्थान ने 49 निकायों में चुनाव करवाए थे। इसमें हनुमानगढ़ नगर परिषद भी शामिल थी। पांच साल पहले 19 नवंबर 2019 मंगलवार के दिन पार्षदों का निर्वाचन हुआ था। 19 नवंबर 2024 को भी मंगलवार है। ऐसे में पार्षदों का पांच साल का कार्यकाल समाप्त हो गया है। करीब दो माह पहले राज्य सरकार ने निकाय चुनाव टाल दिए थे और 49 निकायों में प्रशासक लगाने की जानकारी दी थी।

रोजाना हो रहे एक दर्जन के करीब लोकार्पण

प्रशासक लगने के कारण नगर परिषद में अफरा-तफरा वाला माहौल है। लोगों में अपना कार्य पहले करवाने के लिए होड मची हुई है तो पार्षद अपने-अपने क्षेत्र में रूके हुए कार्य शुरू करवा रहे हैं। नगर परिषद की ओर से प्रतिदिन करीब एक दर्जन निर्माण कार्यों का शिलान्यास या फिर उद्घाटन किया जा रहा है। यह सिलसिला दीपावली के त्यौहार से पहले शुरू हुआ था जो अब तक जारी है।
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11 माह का होगा कार्यकाल

सभापति सुमित रणवा का कार्यकाल करीब 11 माह का होगा। गणेशराज बंसल के विधायक बनने के बाद उन्होंने अपने विश्वसनीय सुमित रणवा को डीएलबी की ओर से सभापति मनोनीत करवाते हुए शहर की बागडौर सौंपी थी। इसके बाद 29 दिसंबर 2023 को पूर्व उपसभापति अनिल खीचड़ को हटाने के लिए पार्षद अविश्वास प्रस्ताव लेकर आए थे। इन्हें हटाने के लिए 53 पार्षदों ने अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन किया था।
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पहले 8 वार्ड तो अब 60 वार्ड

नगर निकाय क्षेत्र में शुरुआती दौर में जनसंख्या बेहद कम थी। उस वक्त केवल आठ वार्ड ही हुआ करते थे। वर्ष 1951 में हनुमानगढ़ शहर की आबादी केवल 6837 थी। करीब तीस साल में शहर की आबादी दस गुना तक बढ़ गई है। 1981 की जनगणना के अनुसार शहर की आबादी 60,071 थी, जो वर्तमान में बढ़कर पौने दो लाख के करीब हो गई है। जनसंख्या में बढ़ोतरी होने के साथ-साथ वार्डों की संख्या में भी बढ़ोतरी हुई। 1947 में नगर निकाय की राजनीति महज आठ वार्ड से शुरू हुई जो कि 45 वार्डों से 60 वार्डों तक पहुंच गई है।
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1947 में हुआ करते थे आठ वार्ड

परिषद से प्राप्त जानकारी के अनुसार 1947 में आठ वार्ड हुआ करते थे। इन वार्डों से चुने गए पार्षदों की ओर से दो महिला पार्षद को निर्वाचित किया जाता था। जिन्हें अध्यक्ष चुनने का भी अधिकार होता था। 1964 में निकाय चुनाव में पंद्रह वार्ड थे। इनसे चुने गए पार्षदों ने दो महिला पार्षद को निवार्चित कर बृजप्रकाश गोयल को अध्यक्ष चुना गया। 1982 में निकाय क्षेत्र की जनसंख्या लगातार बढ़ी तो वार्डों की संख्या 24 तक पहुंच गई। इन सभी पार्षदों ने दो महिला पार्षदों को चुना। इन 26 पार्षदों में 14 मत हासिल करने वाला उम्मीदवार चेयरमैन चुना गया था। 1994 के निकाय चुनावों में वार्डों की संख्या चालीस हो चुकी थी। राज्य सरकार के निर्देशानुसार दो महिला पार्षदों को निवार्चिंत करने की बजाए पार्षदों को मनोनीत करने की प्रथा यहां से शुरू हो गई थी। मनोनीत पार्षद सरकार की ओर से चुने जाने लगे और अध्यक्ष को मत देने का अधिकार नहीं दिया गया। 2006 में वार्डों की संख्या 45 हो हई और वर्तमान में यह संख्या 60 हो चुकी है।
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गाइडलाइन का इंतजार – जिला कलक्टर, हनुमानगढ़

जिला कलक्टर, हनुमानगढ़ कानाराम ने बताया कि निकायों में प्रशासक लगाने को लेकर राज्य सरकारी की गाइडलाइन का इंतजार है। दिशा-निर्देश मिलने पर आगामी कार्यवाही की जाएगी।
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आजादी से निर्वाचन प्रक्रिया तक का सफर

नगर परिषद रिकॉर्ड के अनुसार वर्ष 1947 में पहला अध्यक्ष चुना गया। उस वक्त टाउन क्षेत्र में केवल आठ वार्ड ही हुआ करते थे। 1964 तक लगातार मंडल का अध्यक्ष चुना गया। लेकिन इसके पश्चात करीब पंद्रह वर्ष 23 दिन तक पालिका का प्रशासन प्रशासकों के अधीन रहा जो समय-समय पर बदलते रहे। राज्य सरकार की ओर से चुनाव कराने पर बहादुचंद जैन की अध्यक्षता में निर्वाचित मण्डल ने 18 फरवरी 1982 को मण्डल का कार्यभार संभाला। 15 फरवरी 1986 तक जैन ही मण्डल अध्यक्ष रहे। 16 फरवरी 1967 से 17 फरवरी 1994 की अवधि में पालिका प्रशासन पुन: प्रशासकों के अधीन रहा। 29 नवंबर 1994 में निर्वाचन प्रक्रिया प्रारंभ हुई और राजकुमार तंवर अध्यक्ष चुने गए थे।
1- घनश्यामदास मित्रुका 04-02-1947 से 05-02-1952
2- घनश्यामदास मित्रुका 05-02-1952 से 05-02-1955
3- लक्ष्मीनारायण बिहाणी 05-02-1955 से 05-02-1957
4- लक्ष्मीनारायण बिहाणी 05-02-1957 से 05-02-1959
5- घनश्यामदास मित्रुका 06-02-1959 से 07-03-1960
6- बृजलाल गोयल 21-01-1964 से 23-01-1967
7- बहादुर चंद जैन 18-02-1982 से 15-02-1986
8- राजकुमार तंवर 29-11-1994 से 28-11-1999
9- संगीता मिड्ढ़ा 29-11-1999 से 14-09-2001
10- यादवेन्द्र शर्मा 15-09-2001 से 13-10-2001
11- संगीता मिड्ढ़ा 20-10-2001 से 16-08-2002
12- यादवेन्द्र शर्मा 17-08-2002 से 03-01-2003
13- संतोष बंसल 03-01-2003 से 16-08-2004
14- गिरदावरी देवी 18-08-2004 से 14-09-2004
15- संतोष बंसल 15-09-2004 से 27-11-2004
16- अमरसिंह राठौड़ 27-11-2004 से 22-08-2006
17- पवन कुमार अग्रवाल 23-08-2006 से 24-11-2009
18- सुरेन्द्र कौर 26-11-2009 से 25-11-2014
19- राजकुमार हिसारिया 26-11-2014 से 25-11-2019
20- गणेशराज बंसल 26-11-2019 से 13-12-2023
21- सुमित रणवा 14-12-2023 से अभी तक।

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