इस सीट में वापसी के लिए कांग्रेस वर्ष 1999 से संषर्घ कर रही है, लेकिन जीत नहीं मिल रही। पांच बार इस सीट से भाजपा ने जीत दर्ज की है। हार जीत के परिणाम इशारा करते हैं कि रायगढ़ सीट में पहले जहां अलट लहर था, वहीं अब मोदी लहर ने इस सीट को बीजेपी का गढ़ बना दिया। रायगढ़ लोकसभा 1962 में अस्तित्व में आया। यह सीट आदिवासी वर्ग के लिए आरक्षित है।
यहां से पहले सांसद विजय भूषण सिंहदेव निर्वाचित हुए। वहीं वर्ष 1989 में भाजपा के नंदकुमार साय रायगढ़ लोकसभा से सांसद निर्वाचित हुए। इसी तरह वर्ष 1998 में कांग्रेस के अजीत जोगी रायगढ़ लोक सभा से सांसद निर्वाचित हुए।
मध्य प्रदेश से अलग होकर छत्तीसगढ़ का गठन किए जाने के बाद रायगढ़ लोकसभा के सांसद रहे अजीत जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री बने। वर्ष 1999 में भाजपा ने इस सीट से विष्णुदेव साय को अपना प्रत्याशी बनाया। 1999 से 2004, 2009, 2014 तक लगातार चार बार से सांसद निर्वाचित हुए।
वर्ष 2019 में भाजपा ने अपना प्रत्याशी बदला और इस बार गोमती साय को अपना प्रत्याशी बनाया। इस बार भी भाजपा प्रत्याशी गोमती साय निर्वाचित हुई। 2019 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने धरमजयगढ़ के सिटिंग विधायक लालजीत सिंह राठिया को अपना प्रत्याशी बनाया था। भाजपा की गोमती साय ने कांग्रेस के लालजीत सिंह राठिया को करीब 66 हजार वोटों से हराया था।
इस समय तीसरे नंबर पर बसपा रही। बसपा प्रत्याशी को 26,596 हजार वोट मिले थे। इस तरह छत्तीसगढ़ गठन के बाद से कांग्रेस इस सीट पर एक बार भी जीत दर्ज नहीं कर सकी है।
मध्य प्रदेश के समय में इस सीट पर कांग्रेस का भी जलवा रहा है। रायगढ़ राजघराना से पुष्पा देवी सिंह तीन बार रायगढ़ लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हो चुकी हैं। वर्ष 1980 से 1984 तक दो बार लगातार सांसद निर्वाचित हुई। वहीं इसके बाद वर्ष 1991 में एक बार सांसद निर्वाचित हुईं।