छात्र, किसान, निर्वाचित प्रतिनिधि और संत का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 60 लोग छह नवंबर को श्रृंगेरी से शुरू होने वाले इस पदयात्रा में भाग लेंगे। पदयात्रा का पहला चरण 15 नवंबर को हरिहर में समाप्त होगा। कोप्पल जिले के गंगावती तालुक में हरिहर से किष्किंध तक पदयात्रा का दूसरा चरण बाद में शुरू किया जाएगा।
पर्यावरण ट्रस्ट के अध्यक्ष प्रो. बी.एम. कुमारस्वामी ने सोमवार को शिवमोग्गा में एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि निर्वाचित प्रतिनिधियों, धार्मिक संस्थानों और सरकारी अधिकारियों की भागीदारी के साथ पदयात्रा की तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। इस मार्च का मुख्य उद्देश्य जल निकायों को प्रदूषण से मुक्त रखने की आवश्यकता के बारे में जागरूकता फैलाना है।
उन्होंने कहा, 2023 में किए गए तुंग अभियान के परिणामस्वरूप कर्नाटक सरकार पर नदी को साफ रखने की दिशा में कुछ उपाय लागू करने का दबाव पड़ा। अब हम स्वच्छ तुंगभद्रा अभियान चला रहे हैं। मार्च के तुरंत बाद, हम कर्नाटक सरकार Karnataka Government को एक रिपोर्ट सौंपेंगे और इसे जनता के लिए भी जारी करेंगे।उन्होंने कहा कि यात्रा के दौरान, प्रतिभागी शहरी इलाकों में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और ग्राम पंचायतों में मिनी-एसटीपी की आवश्यकता पर प्रकाश डालेंगे। तुंगभद्रा कर्नाटक में हजारों लोगों और किसानों के लिए पानी का एक प्रमुख स्रोत है। हमें इसकी स्वच्छता बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है।
विभिन्न क्षेत्रों व राजनीतिक दल से जुड़े लोगों ने इस मार्च को अपना समर्थन दिया है। श्रृंगेरी में पदयात्रा के उद्घाटन समारोह में श्रृंगेरी के संत भारती तीर्थ स्वामी, उत्तर प्रदेश के सामाजिक कार्यकर्ता उमा शंकर पांडे, श्रृंगेरी के विधायक टी.डी. राजे गौड़ा और अन्य लोग हिस्सा लेंगे।
चिकित्सक भी साथ इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आईएमए) की शिवमोग्गा शाखा ने निर्मल तुंगभद्रा अभियान Nirmal Tungabhadra Campaign को समर्थन दिया है। आइएमए Indian Medical Association शिवमोग्गा के अध्यक्ष डॉ. एस. श्रीधर ने बताया कि प्रदूषित पेयजल कई बीमारियों का प्रमुख कारण है। शिवमोग्गा पहुंचने पर आइएमए के सदस्य पदयात्रा में शामिल होंगे। इसके अलावा, विभिन्न स्थानों पर कार्यरत चिकित्सक भी पदयात्रा में शामिल होंगे।