यहां प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश
आजम खान को लेकर नाराजगी की कोई खास वजह
मैं ग्लानि में हूं कि कैसे लोगों के साथ मैं रहा। मैं राम नाईक से मिला, योगी आदित्यनाथ से मिला। फिर रामपुर गया। बैठा रहा। उसके दरवाजे तक गया कि जो करना है करो। उसने हमारे परिवार की बेटियों के लिए बहुत गलत बात कही है, लेकिन आज तक उसके खिलाफ एफआईआर नहीं हुई। अब मैं दिल्ली से लखनऊ जाऊंगा। गाड़ियों के काफिले के साथ जाऊंगा। पूरे रास्ते में आजम का वह विडियो दिखाऊंगा। जितनी भीड़ ले जा सकता हूं ले जाऊंगा और संबंधित थाने में अपने समर्थकों के साथ जाऊंगा एफआईआर की अपील करूंगा। एफआईआर नहीं हुई तो मैं वहीं बैठूंगा। इससे सरकार की स्थिति हास्यास्पद होती है तो हो।
आपकी शिकायत पर केस क्यों नहीं दर्ज हो रहा
मैं पीएम नरेन्द्र मोदी का समर्थक हूं इसका मतलब यह नहीं कि अपमान सहूं। न हमने बीजेपी से सहयोग मांगा न संघ से सहयोग मांगा। मैं तो पद विहीन संगठन विहीन एक इंडिविजुअल हूं। वन मैन आर्मी की तरह। हम नोटिस देकर गए, लेकिन हमसे न सुनील बंसल मिले, ना ही बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष। उलटे स्टेट बीजेपी ने तो हमारा विरोध कर दिया। केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि अमर सिंह और आजम का झगड़ा समाजवादी पार्टी का आंतरिक झगड़ा है। मैंने समाजवादी पार्टी से निष्कासित होने के बाद खुलेआम बीजेपी का प्रचार किया था पिछले चुनाव में। केशव प्रसाद मौर्या को या तो राजनीतिक ज्ञान नहीं है या वह अपरिपक्व हैं। उनके लिए अभी बुद्धि विकास की आवश्यकता है। वह अभिजात्य वर्ग की बराबरी में नहीं आए हैं। स्वामी प्रसाद मौर्या अगर ऐसा बोलते तो समझ आता। वह बीएसपी में रहे हैं, हमारा राजनीतिक विरोध रहा है, लेकिन उपमुख्यमंत्री बोल पड़े इसका मुझे बहुत कष्ट है। 6 तारीख को मैं गोरखपुर जा रहा हूं। मैं वहां केशव मौर्या की बात का जवाब दूंगा।
क्या यूपी में हो पाएगा एसपी-बीएसपी का गठबंधन
अब एसपी में मुलायम सिंह भी सक्रिय होकर सामने आ गए हैं तो मायावती को गेस्ट हाउस कांड याद आएगा। राज्य सभा में मायावती के उम्मीदवार के मुकाबले उन्होंने जया बच्चन को विजयी बनाने में ज्यादा दम लगाया। लोकसभा के उपचुनावों में सपोर्ट देकर मायावती ने उनको तीन सांसद दिए लेकिन उसके बदले में अखिलेश ने जया बच्चन की जगह मायावती को तरजीह नहीं दी। एसपी ने मायावती के लिए कोई मधुर स्मृति नहीं छोड़ी है, जिसकी वजह से मायावती उसका साथ देने के लिए प्रतिबद्ध हों। जबकि जया बच्चन तो अपने परिवार को भी चुनाव में लाने की हैसियत नहीं रखतीं। मायावती कांग्रेस से बात करते-करते छत्तीसगढ़ में जोगी के साथ मिल गईं। पता नहीं अखिलेश से बात करते-करते कहीं शिवपाल से मिल जाएं।
निश्चित रूप से एक बड़ी गलती हुई है। एससी एसटी एक्ट में जब सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दे दिया तो परिवर्तन की कोई जरूरत नहीं थी। इससे राजस्थान के सवर्ण, एमपी के सवर्ण बुरी तरह नाराज हैं। बीजेपी पास इस तरह का कोई प्रवक्ता नहीं है जो यह बताए कि इस भूल के बावजूद अगर आप मोदी जी को हराते हैं तो दूसरे लोग कानून के डंडे का भारी दुरुपयोग करेंगे। कानून होने पर भी अगर मोदी जी आए तो उनको सुरक्षा मिलेगी। कम से कम निर्दोष को तो सजा नहीं मिलेगी। नोटा से भी तो नुकसान मोदी जी को होगा। मध्य प्रदेश में भी इसका असर देखा जा रहा है।
आप खुद को समाजवादी पार्टी की सोच के करीब पाते हैं या संघ की
हम समाजवादी पार्टी की मूल विचारधारा के साथ हैं जिससे वे भटक गए हैं। एक झंडा एक विधान एक संविधान पर लोहिया जी का बयान है इस पर ये बदल गए। लोहिया जी चित्रकूट में रामायण मेला लगाया करते थे। मुलायम ने कितनी बार रामायण मेला लगाया। तो भटका कौन है। लोहिया जी का नाम मत लीजिए। ये कहिए कि ये समाजवादी पार्टी का मुलायमी संस्करण है। हां रहे, पर रहकर हमको क्या मिला. हम राक्षसों के शुक्राचार्य रहे। हम जैसी सोहबत रखेंगे, उसका फल मिलेगा। दो बार जूता मारकर इन्होंने निकाला और हमारी बेटियों को तेजाब से नहलाने की बात की। इसके बाद भी हमारी आंखें न खुलें, मोह भंग न हो ऐसी समाजवादी पार्टी से मैं खुद को अलग करता हूं।