बहन के घर जाने की कहकर निकला पुलिस ने बताया कि 22 फरवरी को दोपहर 12 बजे विक्रम बैरवा बैग लेेकर घर से निकला। तब पड़ोसी दुकानदार कैलाश यादव ने टोका। तब उसने कहा कि वह प्रताप नगर में रहने वाली बहन के घर जा रहा है।
फोन कर कहा पत्नी से बात करवा दो विक्रम ने 23 फरवरी की सुबह साढ़े सात बजे आर्मी नगर में पड़ोसी मोहनलाल शास्त्री के घर फोन कर कहा कि उसकी पत्नी रोशनी फोन रिसीव नहीं कर रही। उसके कमरे पर जाकर रोशनी से बात करवा दो। रोशनी से बात करवाने के लिए मोहनलाल की बेटी गौरा उसके कमरे पर पहुंची। फर्श पर लगे बिस्तर पर कंबल ओढकर रोशनी सो रही थी। कंबल हटाया तो गौरा की चीख निकल गई। रोशनी के गले में चुन्नी का फंदा था और उसके नाक व मुंह से खून निकल रहा था।
आने की कहकर मोबाइल बंद किया गौरा की चीख सुनकर स्थानीय लोग जुट गए। लोगों ने विक्रम बैरवा को फोन कर घटना की जानकारी दी। तब उसने कहा कि वह आ रहा है। इसके बाद मोबाइल बंद कर लिया। उत्तर प्रदेश से रोशनी के परिजनों के पहुंचने पर गुरुवार को पोस्टमार्टम करवाया गया। हत्या के बाद रोशनी के कानों की बालियां, अंगूठी व मोबाइल भी ले गया। रोशनी के मोबाइल से ही विक्रम ने पड़ोसी को फोन किया था।
रोशनी के पिता की मदद करने का झांसा दे पहले भी रुपए व जेवर ठगे जयपुर पहुंचे परिजनों ने पुलिस को बताया कि रोशनी के पिता एक मामले में जेल में बंद हैं। रोशनी दो वर्ष पहले अपनी बड़ी बहन के पास चंडीगढ़ रहने गई थी। वहां पर विक्रम से मुलाकात हुई। विक्रम ने खुद को रेलवे में दरोगा बताया था। रोशनी और उसके परिवार को पिता को जेल से बाहर निकालने में मदद करने का झांसा दिया। इसके बदले में रोशनी के परिवार से मोटी रकम और उसकी मां के जेवर लेकर भाग गया था। ठगी का पता चलने पर मुकदमा दर्ज कराने जा रहे थे, तभी विक्रम ने घर आकर माफी मांगी और रुपए वापस लौटाने के लिए कहा। फिर रोशनी को बहला फुसलाकर भगाकर जयपुर ले आया। रोशनी के जरिए विक्रम उनसे बात करता और रुपए व जेवर लौटाने का आश्वासन दे रहा था।
घर भी नहीं गया करधनी थानाधिकारी बी.एल. मीना ने बताया कि आरोपी विक्रम के दौसा गांव में टीम पहुंची। आरोपी वहां भी नहीं गया। उसकी तलाश में टीम जुटी है।