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54 साल से स्थापित हो रही महाराष्ट्र की मिट्टी से बनी मूर्ति

शहर के ऐसे कई पंडाल और मंडल हैं जो ऐतिहासिक है या लगातार कई सालों से गणेश जी की स्थापना करते आ रहे हैं। ऐसे ही शहर के रामबाग क्षेत्र के आफले चौक में श्री महाराष्ट्र मंडल है जो 1968 से गणेश जी की स्थापना कर रहे हैं।

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इंदौर

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Ramesh Vaidh

Sep 03, 2022

54 साल से स्थापित हो रही महाराष्ट्र की मिट्टी से बनी मूर्ति

इंदौर. शहर को अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक स्थलों और कार्यों के लिए जाना जाता है। शहर के ऐसे कई पंडाल और मंडल हैं जो ऐतिहासिक है या लगातार कई सालों से गणेश जी की स्थापना करते आ रहे हैं। ऐसे ही शहर के रामबाग क्षेत्र के आफले चौक में श्री महाराष्ट्र मंडल है जो 1968 से गणेश जी की स्थापना कर रहे हैं। खास बात यह है कि यह मंडल प्रतिवर्ष महाराष्ट्र के पुणे में निर्मित विशेष मिट्टी के गणेश प्रतिमा की ही स्थापना करते हैं।
नि:शुल्क उपनयन संस्कार और प्रतियोगिताएं : श्री महाराष्ट्र मंडल 1999 से सामूहिक उपनयन संस्कार भी करते आ रहा है। पिछले 8 साल से यह नि:शुल्क किया जाता है। इसमें शहर के कई भक्त आते हैं। मंडल का यह जनेऊ कार्यक्रम अपने 24 वर्ष पूरे कर चुका है। साथ ही बच्चों एवं महिलाओं के लिए चित्रकला, रंगोली, व्यंजन और लेखन जैसी प्रतियोगिताओं का भी आयोजन करते हैं।
समाजसेवा और अन्य कार्यों में भी एक्टिव
मंडल प्रतिवर्ष गणेश स्थापना के अलावा समाज के अन्य कार्यों में भी एक्टिव है। कोरोना काल में भी कई लोगों की मदद की। समाज में होने वाले कार्यों में भी बढ़-चढक़र हिस्सा लेेते हैं। रक्तदान शिविर के साथ जरूरतमंदों की मदद करते हैं। इस वर्ष गणेश चतुर्थी के पूरे दस दिनों तक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

यहां आंकड़े के रूप में विराजित है श्रीगणेश
श्रीतेजेश्वर गणपति
इंदौर. शहर में ऐसा मंदिर है, जहां भगवान गणेश की प्रतिमा सफेद आकड़े की जड़ से बनी हुई है। इस प्रतिमा को कफ्र्यू के दौरान जमीन खोदकर बाहर निकालकर सिलावटपुरा में 16 किलो चांदी के ङ्क्षसहासन पर विराजित किया गया। यह श्रीगणेशधाम 38 साल पुराना मंदिर है। सफेद आक की यह गणेश प्रतिमा श्रीतेजेश्वर चिंतामण गणपति के नाम से प्रसिद्ध है। वहीं, भगवान के समक्ष 6 किलो चांदी का मूषक भी है। इसके अलावा आसपास शुभ-लाभ और रिद्धि-सिद्धि भी हैं। मंदिर में शिव परिवार के साथ राम दरबार भी है। मंदिर में साध्वी ऋतंभरा, कनकेश्वरी देवी, अवधेशानंद महाराज सहित कई साधु-संत आ चुके हैं। मंदिर के पुजारी अजय राठौर ने बताया कि वर्ष 1983 हमारे दादा तेजकरण राठौर रोजाना हरसिद्धी फूलमंडी पर नर्मदेश्वर मंदिर में पूजा करने पहुंचे थे। उन्हें बिजासन माता का ईष्ट था। जिस पेड़ से फूल तोड़ते थे वह काफी पुराना हो चुका था। एक दिन पूजन के दौरान ही उन्हें चेतना आई कि आंकड़े के पेड़ के नीचे गणेशजी मौजूद है। इस पर उन्होंने खुदाई की तो आंकड़े के पेड़ की जड़ में गणेशजी की आकृति निकली। उस दौरान कफ्र्यू होने लगा होने के बावजूद उन्होंने प्रतिमा को को सिलावटपुरा में श्रीगणेशधाम में स्थापना की। वर्ष 1984 में उक्त प्रतिमा को पुष्य नक्षत्र में विधिवत स्थापित की।