Dust Mites : एक विशेषज्ञ ने चेतावनी दी है कि डस्ट माइट्स के संपर्क में आने से बच्चों में गंभीर एलर्जी हो सकती है, जिससे अस्थमा और एलर्जिक राइनाइटिस जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
Dust Mites : बच्चों में गंभीर एलर्जी और अस्थमा के मामलों में वृद्धि का मुख्य कारण डस्ट माइट्स (Dust Mites) का संपर्क है। यह एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या बनती जा रही है, खासकर भारत जैसे आर्द्र जलवायु वाले देशों में।
डस्ट माइट्स (Dust Mites) सूक्ष्म जीव होते हैं, जो आमतौर पर घरेलू धूल में पाए जाते हैं। इनका आकार इंसान के बाल की मोटाई से थोड़ा बड़ा होता है। ये विश्वभर में एलर्जी का एक प्रमुख कारण हैं।
सर गंगा राम अस्पताल के सीनियर एलर्जी विशेषज्ञ, डॉ. नीरज गुप्ता के अनुसार, भारत में उच्च आर्द्रता की वजह से ये सूक्ष्म जीव तेजी से बढ़ते हैं। इससे बच्चों और वयस्कों में अस्थमा और एलर्जिक राइनाइटिस जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
भारत में अस्थमा के लगभग 3.5 करोड़ मरीज हैं। अनुमान के अनुसार, 2.4 प्रतिशत वयस्क और 4 से 20 प्रतिशत बच्चे इस समस्या से प्रभावित हैं। इसके अलावा, लगभग 22 प्रतिशत किशोर एलर्जिक राइनाइटिस से पीड़ित हैं।
डॉ. गुप्ता के अनुसार, डस्ट माइट्स से होने वाली एलर्जी के प्रमुख लक्षण हैं:
- बार-बार और जोर से छींक आना
- नाक बहना या नाक में रुकावट होना
- पुरानी सूखी खांसी, जो सुबह और रात में अधिक होती है
- शारीरिक गतिविधि के दौरान सांस फूलना
- सांस लेते समय घरघराहट की आवाज
- एलर्जी से बचाव के उपाय
- गद्दे, तकिए और डुवेट के लिए एलर्जी-प्रूफ कवर का उपयोग करें।
- बिस्तर की चादर को नियमित रूप से गर्म पानी में धोएं।
- घर में कालीनों का उपयोग कम करें, क्योंकि ये डस्ट माइट्स का घर होते हैं।
- उच्च गुणवत्ता वाले पार्टिकुलेट एयर (HEPA) फिल्टर का उपयोग करें।
- घर के अंदर आर्द्रता का स्तर 50 प्रतिशत से कम रखें और पर्याप्त धूप तथा क्रॉस वेंटिलेशन का ध्यान रखें।
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डस्ट माइट्स से उत्पन्न एलर्जी और अस्थमा बच्चों के लिए गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं हैं। इस समस्या से निपटने के लिए जागरूकता और सावधानियों का पालन करना आवश्यक है। उचित उपायों के माध्यम से हम इन सूक्ष्म जीवों के प्रभाव को कम कर सकते हैं और बच्चों के स्वास्थ्य की रक्षा कर सकते हैं।