
Mahant Dharm das
फैजाबाद ( अयोध्या ) आगामी 29 अक्टूबर से देश की सबसे बड़ी अदालत में देश के सबसे बड़े मुकदमे की सुनवाई सिलसिलेवार तरीके से शुरू हो रही है | विवादित स्थल पर भव्य मंदिर निर्माण का दावा लेकर हिंदू पक्ष कार इस फैसले के इंतजार में है कि जल्द ही उन्हें राम मंदिर बनाने की अनुमति मिल जाएगी | वहीँ मुस्लिम पक्षकार भी अपने दावों को मजबूत बताते हुए फैसला अपने पक्ष में आने की बात कह रहे हैं | लेकिन इन तमाम दावों के बीच मंदिर निर्माण का समर्थन करने वाले पक्षकारों में ही आपस में तनातनी बढ़ती जा रही है | सुप्रीम कोर्ट में राम मंदिर मुकदमे के मुख्य पक्षकारों में से एक | महंत धर्मदास ने विश्व हिंदू परिषद पर बड़ा आरोप लगाया है | महंत धर्म दास का कहना है की बीते 50 वर्षों से यह मुकदमा चल रहा है और किसी ने कोई जल्दबाजी नहीं की | लेकिन जब मुकदमा फैसले के करीब है और रामलला के पक्ष में फैसला आने वाला है ऐसे में अब आंदोलन भूख हड़ताल और सरकार पर दबाव बनाने का अनायास प्रयास हो रहा है | जबकि हर कोई जानता है कि मंदिर का निर्माण योगी और मोदी के बस की बात नहीं है | यह पूरा मामला सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर निर्भर करता है | ऐसे में संतों की उच्च अधिकार समिति की बैठक का कोई अर्थ नहीं निकलता |
महंत धर्मदास ने विहिप और उसके समर्थक संतों पर जो आरोप लगाए हैं वो बेहद चौकाने वाले हैं
महंत धर्मदास विश्व हिंदू परिषद से इतने नाराज हैं कि उन्होंने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि जानबूझकर उन्हें अलग-थलग किया जा रहा है | सुप्रीम कोर्ट में फैसला आने वाला है लेकिन जिस तरह के आंदोलन की बात विश्व हिंदू परिषद और उसका समर्थन करने वाले साधु संत कर रहे हैं इस आंदोलन से कोर्ट में रामलला का पक्ष कमजोर होगा | बताते चले कि महंत धर्मदास को दिल्ली में आयोजित अधिकार समिति में नहीं बुलाया गया जिसे लेकर भी खासा नाराज हैं | महंत धर्मदास ने आरोप लगाया कि उन्हें अलग करने की साजिश की जा रही है| बताते चलें कि सन 1949 में विवादित परिसर में जब राम लला के प्रकट होने का मुकदमा दर्ज हुआ था तो उस समय महंत धर्म दास के गुरु बाबा अभिराम दास मुकदमे के मुख्य अभियुक्त थे | उसी मुकदमे के दम पर विवादित परिसर को कुर्क करने का आदेश दिया गया था और रिसीवर नियुक्त किए गए थे | इसी मुकदमें के कायम मुकामी बनकर धर्मदास लगातार मुकदमा लड़ते आ रहे हैं उनके गुरु ने विवादित परिसर के करीब राम जन्मभूमि न्यास को अपनी जमीन देकर विश्व हिंदू परिषद को एक मजबूत स्थिति में पहुंचाया था | बावजूद उसके अब उन्हें दरकिनार किया जा रहा है | फिलहाल जहां एक तरफ सुप्रीम कोर्ट में 29 अक्टूबर से इस मुकदमे की नियमित सुनवाई शुरू हो रही है वहीं दूसरी तरफ हिंदू पक्षकारों में आपसी मतभेद रामलला के पक्ष में नहीं है |
Published on:
06 Oct 2018 01:17 pm
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