भारत में हर साल फेफड़े के कैंसर (Lung cancer) के 67 हजार नए मामले सामने आते हैं। काफी लंबे समय तक ऐसा माना जाता रहा था कि फेफड़ों का कैंसर सिर्फ उन पुरुषों को ही अपना शिकार बनाता है जो धूम्रपान करते हैं या धूम्रपान किया करते थे।
हाल के अध्ययनों के नतीजों से यह स्पष्ट हुआ है कि धूम्रपान नहीं करने वाले लोगों को भी फेफड़ों का कैंसर हो सकता है। एक खास तरह का लंग कैंसर जिसे नॉन-स्मॉल सैल लंग कैंसर (Non-small cell lung cancer) (एनएससीएलसी) कहा जाता है, सभी तरह के लंग कैंसर के मामलों में 85 प्रतिशत पाया जाता है। ऐसे अधिकांश मामले देरी से पकड़ में आते हैं, क्योंकि शुरुआत में कोई लक्षण दिखाई नहीं देते या दिखते भी हैं तो उन्हें दूसरी आम बीमारियों की तरह समझा जाता है। यही वजह है कि ऐसे में इलाज करना काफी चुनौतीपूर्ण बन जाता है।