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सीवेज खुले में बहाया या जलस्रोतों में मिलाया तो होगी कार्रवाई, लगेगा जुर्माना

एनजीटी ने दिया आदेश- सीवेज न खुले में बहे और न जलस्रोतों में मिले, ननि यह सुनिश्चित करे, उल्लंघन करने वालों पर लगेगा पर्यावरण क्षति हर्जाना

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भोपाल

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Sunil Mishra

Feb 17, 2023

NGT

एनजीटी ने की मध्यप्रदेश के अ​धिकारियों पर तीखी टिप्पणी

भोपाल. एनजीटी ने निर्देश दिए हैं कि नगर निगम और एमपीपीसीबी यह सुनिश्चित करें कि अनुपचारित सीवेज खुले में नहीं बहे और जलस्रोतों में भी नहीं मिले। इसके लिए समुचित व्यवस्था की जाए। इसका उल्लंघन पाए जाने पर जिम्मेदारों के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाए।
एनजीटी सेंट्रल जोन बेंच ने रिटायर्ड मेजर जनरल हरप्रीत सिंह बेदी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया है। इसमें करोंद बायपास स्थित द्वारकाधाम कॉलोनी में सीवेज खुले में बहाने और रहवासियों को गंदा पानी सप्लाई करने की शिकायत की गई थी। इस मामले में एनजीटी द्वारा गठित विशेषज्ञ समिति ने कॉलोनाइजर पर 17 करोड़ रूपए का पर्यावरण क्षति हर्जाना लगाया था। इसके पहले सीपीसीबी द्वारा भी 30 लाख रूपए जुर्माना लगाया गया था। लेकिन बिल्डर ने यह जमा नहीं कराया है। एनजीटी ने अब इस मामले में कॉलोनाइजर की सुनवाई कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। टि्रब्यूनल ने कहा है कि नगर निगम, एमपीपीसीबी और कॉलोनाइजर आपस में तय कर रहवासियों को शुद्ध पेयजल की सप्लाई सुनिश्चित करें। ननि की ओर से बताया गया कि नर्मदा लाइन वहां तक आ गई है। अब रहवासी आवेदन देकर कनेक्शन ले सकते हैं। इसके लिए तय शुल्क भी चुकाना होगा।

क्रूज मामले में सीपीसीबी ने निरीक्षण कर लिए सेंपल
एनजीटी में डॉ सुभाष पांडे द्वारा लगाई गई क्रूज संबंधी याचिका पर भी सुनवाई हुई। इस दौरान सीपीसीबी की ओर से बताया गया कि बड़े तालाब में चल रहे क्रूज का टीम ने निरीक्षण कर सेंपल ले लिए हैं। अभी उनके एनालिसिस में समय लग रहा है। इसलिए रिपोर्ट देने के लिए एनजीटी ने समय दे दिया है।
तालाब किनारे अतिक्रमण हटाने के लिए ननि ने लिया समय
आर्या श्रीवास्तव द्वारा लगाए गए तालाब किनारे अतिक्रमण संबंधी केस में नगर निगम ने अतिक्रमण हटाने के लिए समय मांगा है। निगम की ओर से बताया गया कि सेमि परमानेंट निर्माणों को हटाने पर विवाद चल रहा है। वहीं पुनर्वास का मामला शासन के पास विचाराधीन है। इसलिए कार्रवाई में समय लग रहा है।