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जहां कल धोए थे बर्तन, आज उसी रेस्टोरेंट के मालिक, पढ़िए अमोल कोहली की सक्सेस स्टोरी

Amol Kohli Success Story: अमोल कोहली ने 15 साल की उम्र में फ्रेंडलीज़ में बर्तन धोने से शुरुआत की और 22 साल बाद पूरी चेन खरीद ली।

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भारत

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MI Zahir

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Neeraj Nayyar

Nov 04, 2025

Amol Kohli Success Story

भारतीय मूल के अमोल कोहली की सक्सेस स्टोरी। (फोटो: brix holdings/linkedin.)

Amol Kohli Success Story: इस कमाल के शख्स ने जहां कभी बर्तन धोए थे ,आज वह उसी रेस्टोरेंट का मालिक है। यह कहानी है भारतीय मूल के अमोल कोहली (Amol Kohli) की। कोहली ने जब 2003 में अमेरिका के फिलाडेल्फिया स्थित फ्रेंडलीज़ रेस्टोरेंट (Friendly's Acquisition) में अपनी पहली नौकरी की, तब उनकी उम्र महज 15 साल थी और करीब 22 साल बाद उन्होंने पूरा रेस्टोरेंट (Restaurant Success Story) ही खरीद लिया। दिलचस्प बात यह है कि अमोल कोहली फ्रेंडलीज़ रेस्टोरेंट में आइसक्रीम के स्कूप तैयार करने से लेकर बर्तन धोने और ग्राहकों को खाना सर्व करने तक सारा काम किया करते थे। उस समय उनका उद्देश्य बस एक ही था - जेब खर्च के लिए कुछ पैसे कमाना (From Waiter to Owner)। आज वह न केवल इस रेस्टोरेंट चेन के मालिक हैं, बल्कि अपनी एक इनवेस्टमेंट फर्म भी चलाते हैं। सीएनबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, महज 37 साल की उम्र में ही कोहली (Indian Entrepreneur US) ने मशहूर डिनर-स्टाइल रेस्टोरेंट चेन फ्रेंडलीज़, उसकी पैरेंट कंपनी ब्रिक्स होल्डिंग्स के साथ-साथ छह अन्य फूड ब्रांडस को अपना बना लिया था।

5 डॉलर/ घंटे से करोड़ों डॉलर के मालिक

रेस्टोरेंट में नौकरी के दौरान वह प्रति घंटे 5 डॉलर कमाते थे और आज करोड़ों के मालिक हैं। डेक्सेल यूनिवर्सिटी से फाइनेंस और मार्केटिंग में डबल डिग्री हासिल करने वाले कोहली का ज्यादातर समय फ्रेंडलीज़ पर ही बीता। इस पार्ट-टाइम जॉब ने कोहली को रेस्टोरेंट बिजनेस की समझ दी और उन्होंने इसी में खुद को झोंक दिया। सन 2011 में ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद भी उन्होंने फ्रेंडलीज़ का साथ नहीं छोड़ा, जबकि उनके पास वित्तीय संस्थानों में अच्छे पदों पर नौकरी के ऑफर थे।

कहानी में ऐसे आया ट्विस्ट

कुछ समय बाद उन्हें एक बंद हो रही फ्रेंचाइजी को संभालने का मौका मिला। हालांकि, यह निर्णय आर्थिक लिहाज से उनके लिए अच्छा नहीं रहा। उन पर 25 लाख डॉलर का लोन चढ़ गया और अपनी बचत भी गंवानी पड़ी, लेकिन उन्हें बहुत कुछ सीखने को जरूर मिल। कोरोना महामारी के चलते फ्रेंडलीज़ बर्बादी की कगार पर पहुंच गई। 2020 में कंपनी ने दिवालियापन के लिए अर्जी दाखिल की और ब्रिक्स होल्डिंग्स ने उसे 20 लाख डॉलर से भी कम में खरीद लिया। कोहली इस डील से बहुत दुखी हो गए। इसी साल मई में उन्होंने लेगेसी ब्रांडस इंटरनेशनल नाम से एक इनवेस्टमेंट फर्म की स्थापना की, जिसका एक ही उद्देश्य था - ब्रिक्स होल्डिंग्स को खरीदकर फ्रेंडलीज़ को अपना बनाना।

दिलाई पहले वाली पहचान

जल्द ही कोहली अपने इस उद्देश्य में सफल भी हुए। उन्होंने न केवल फ्रेंडलीज़, ब्रिक्स होल्डिंग्स को खरीदा बल्कि कई दूसरे रेस्टोरेंट के मालिक भी बन गए। फ्रेंडलीज़ को अपना बनाने के बाद कोहली के लिए सबसे बड़ी चुनौती थी, उसे दोबारा पहले वाली स्थिति में पहुंचाना। 1990 में 800 से अधिक आउटलेट्स वाला फ्रेंडलीज़ महज 100 आउटलेट्स पर सिमट गया था। अमोल कोहली ने कंपनी को आधुनिक रूप देने पर काम शुरू किया। मोबाइल ऐप को नए रूप में लॉन्च किया गया, फ्रेंचाइजी का मजबूत नेटवर्क स्थापित किया गया और बात बन गई।

कोई काम छोटा या बड़ा नहीं होता

बहरहाल फ्रेंडलीज़ आज पहले की तरह अमेरिकियों के बीच लोकप्रिय है और अपनी 90वीं वर्षगांठ मना रहे हैं। अमोल कोहली की कहानी दर्शाती है कि मेहनत और जुनून से कुछ भी हासिल किया जा सकता है। कोहली ने सन 2007 में एंटरप्रेन्योर मैगजीन से बातचीत में कहा था कि रेस्टोरेंट में अलग-अलग काम के दौरान उन्हें बहुत कुछ सीखने को मिला। वह मानते हैं कि कोई भी काम छोटा या बड़ा नहीं होता। कोहली की कंपनी ब्रिक्स होल्डिंग्स पूरे अमेरिका में 250 से अधिक रेस्टोरेंट चलाती है, जिसमें क्लीन जूस, ऑरेंज लीफ, रेड मैंगो, स्मूदी फैक्ट्री, सुपर सैलेड और हंबल डोनेट जैसे ब्रांड शामिल हैं।