कोटड़ा केस-01
मां बाड़ी केन्द्र नेत्रावला, जोगीवड़ में टीम पहुंची तो वहां 18 बच्चे मिले। रजिस्टर में 40 बच्चे नामांकित थे। केन्द्र पर बच्चों को पढ़ाने के लिए दो शिक्षक लगा रखे हैं लेकिन एक भी नहीं मिला। रसोई में देखा तो एक महिला पोहे गला कर बैठी थी। राशन और मीनू के बारे में पूछने पर उसने बताया कि फरवरी के बाद राशन नहीं आया। यह पोहे भी उधार से लाकर खिला रहे हैं। ऐसे में कई बच्चों ने आना ही छोड़ दिया है।
केस-02 मां बाड़ी केंद्र जानिया खाखरा में भी 40 बच्चों का नामांकन है लेकिन शिक्षा सहयोगी बंशीलाल ने बताया कि अभी 15-20 बच्चे ही आते हैं। फरवरी में राशन सामग्री आई थी, उसके बाद नहीं मिली। ऐसे में एक बारगी राशन दुकानों से खरीद कर बच्चों को खिला रहे है अन्यथा ये बच्चे भी नहीं आएंगे। राशन सामग्री के लिए अधिकारियों को बताया लेकिन आपूर्ति नहीं हुई। सुपरवाइजर कांता देवी ने बताया कि 103 केन्द्र पर 48 डे केयर है लेकिन तीन माह से वेतन भीं नहीं मिला है।
लसाडिय़ा केस-03 ब्लॉक के जियावत मां बाड़ी केन्द्र पर टीम करीब सुबह 9.30 बजे पहुंची तो केन्द्र पर एक भी छात्र-छात्रा नहीं था। खाना बनाने वाली महिला बर्तन साफ कर रही थी। शिक्षा सहयोगिनी भगवती देवी से बच्चों के बारे में पूछा तो उसने बताया कि 30 का नामंाकन है लेकिन गर्मी की वजह से 10 बच्चे ही आए थे। खाना खिलाकर उनकी छुट्टी कर दी। केन्द्रों का समय सुबह 7:30 से 12 बजे तक का है। एक शिक्षक मौके पर नहीं था जबकि बाबूमेव नाम का व्यक्ति केन्द्र पर उपस्थित था।
केस-04
जाइफला केन्द्र की पड़ताल करने पर वहां भी स्थिति खराब थी। केन्द्र पर 10 बच्चे ही उपस्थिति थे, जो एक कमरे में पढ़ रहे थे। दो में से एक ही शिक्षा सहयोगिनी दुर्गा मीणा मौके पर थी। बच्चों ने परियोजना के तहत नि:शुल्क दी गणवेश में ज्यादा गर्मी लगना भी स्वीकारा।
इनका कहना…. फरवरी में दो माह का पोषाहार भेजा था, जो खत्म हो गया। ऐसी जानकारी नहीं मिली। अभी गर्मी के कारण उपस्थिति कम है। एक सप्ताह में राशन सामग्री केन्द्रों पर पहुंच जाएगी। केन्द्र 11 बजे तक चलाना है। डे-केयर पर दो शिक्षक लगा रखे हैं। अनुपस्थित रहने वालों का पता करवाता हूं।
नरेश पानेरी, परियोजना अधिकारी, स्वच्छ परियोजना