
SURAT KAPDA MANDI: संघे शक्ति कलौयुगे: व्यापारी एकजुट, ठुकराया यूनियन का फरमान
सूरत. सूरत कपड़ा मंडी के रिंगरोड कपड़ा बाजार में बुधवार को कई दिनों बाद व्यापारिक मुद्दे पर व्यापारिक संगठन एकजुट नजर आए। साउथ गुजरात टेक्सटाइल ट्रेडर्स एसोसिएशन के आव्हान पर पार्सल के रेट व और वेट के मुद्दे पर विभिन्न व्यापारिक संगठनों के 50 से ज्यादा टेक्सटाइल मार्केट्स के व्यापारी सूरत टेक्सटाइल मार्केट के बोर्डरुम में आयोजित बैठक में मौजूद रहे। सभी ने एक स्वर में यूनियन के फरमान को ना केवल ठुकराया बल्कि सूरत कपड़ा मंडी की ही अलोकतांत्रिक संस्था के किसी भी फैसले को मानने से भी इंकार किया है।बैठक की जानकारी में एसजीटीटीए के अध्यक्ष सुनीलकुमार जैन ने बताया कि एसोसिएशन के बोर्ड चेयरमैन सांवरप्रसाद बुधिया व एसटीएम के अध्यक्ष हरबंसलाल अरोड़ा की मौजूदगी में आयोजित बैठक में पार्सल के रेट और वेट के मुद्दे पर लेबर यूनियन व ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के फरमान पर सभी व्यापारियों ने एक सुर में कड़ा विरोध जताते हुए रोष प्रकट किया। बैठक में बताया कि ऐसी क्या वजह रही कि पार्सल के रेट और वेट मामले में फरमान जारी किया गया। इसके पीछे कुछ चंद ट्रांसपोर्टर्स की साज़िश की भी चर्चा बैठक में हुई। बैठक में ज्यादातर वक्ताओं ने कपड़ा व्यापारियों से इस मुद्दे पर सहयोग मांगते हुए यह भी खुले शब्दों में कहा कि बाजार में अलोकतांत्रिक ढ़ंग से बैठी संस्था को इस मुद्दे पर किसी भी प्रकार से निर्णय लेने का अधिकार नहीं है। सभा में विचार व्यक्त करने वाले व्यापारियों में हंसराज जैन, अरुण पाटोदिया, गोविंद नारंग, महेश जैन, मोहनकुमार अरोरा, राजेश अग्रवाल, सुदर्शन, लालचंद बरैया, राजू भाई, ललित शर्मा, खेमकरण शर्मा, संजय अग्रवाल आदि शामिल रहे। बैठक में एसजीटीटीए के अलावा सूरत मर्कंटाइल एसोसिएशन, सूरत आढ़तिया कपड़ा एसोसिएशन, साकेत, टेक्सटाइल युवा ब्रिगेड के सदस्य व पदाधिकारी मौजूद थे।
-इन्होंने यह बोला
-रघुकुल मार्केट सोसायटी के अध्यक्ष श्रवण मेंगोतिया ने बताया कि कपड़े के ट्रेडर्स भाइयों का मार्केट बहुत बिखरा हुआ है। इसी का फायदा कपड़ा व्यापार से जुड़े विभिन्न घटक ऐसे फरमान जारी करके उठाते रहे हैं। सच कहें तो हम ट्रेडर्स भाइयों की सहने की आदत बन चुकी है। हम 65 हजार दुकानों की बात करते हैं अगर इसके आधे भी एकजुट हो जाएं, तो हिमालय को हिला सकते हैं।
-सूरत मर्कंटाइल एसोसिएशन के मनोज अग्रवाल ने कहा कि यह कोई मुद्दा ही नहीं है। क्योंकि, भिवंडी से सौ से डेढ़ सौ किलो वजन के पार्सल रेगुलर आते रहे हैं। इसके पीछे कोई बड़ी साजिश नजर आती है। किसी भी प्रकार के फरमान को हम मंजूर नहीं करेंगे। हमें करना भी नहीं चाहिए।
-साकेत के दिनेश कटारिया ने कहा कि संगठन व्यापार की ताकत होती है, लेकिन इस तरह की यूनियनबाजी व्यापार के लिए घातक है। मुंबई के व्यापार को हम यूनियनबाजी के भेंट चढ़ते देख चुके हैं। सूरत में ऐसा नहीं होने देंगे। कपड़ा बाजार में अलोकतांत्रिक तरीके से व्यापारियों की संस्था पर कब्जा जमाए बैठे चंद लोगों को ऐसा क्या लालच है कि वे इतने विरोध के बाद भी कुर्सी से चिपके हुए हैं।
-एसजीटीटीए के बोर्ड चेयरमैन सांवरप्रसाद बुधिया ने कहा कि व्यापारियों को किसी भी प्रकार का फरमान मंजूर तो दूर की बात बर्दाश्त भी नहीं है। विभिन्न घटक अलग-अलग रेट में आपसी सहमति से हमारे साथ काम करते आए हैं। उनके साथ हमें किसी भी प्रकार की असुविधा नहीं रही है। लेबर यूनियन कपड़ा बाजार में किसी असंवैधानिक संस्था से हाथ मिलाकर कोई निर्णय सुनाती है तो व्यापारियों को उसका बहिष्कार करना होगा। ट्रांसपोर्ट गलत तरीके से यदि पार्सल को रोकते हैं तो उसकी शिकायत हमें पुलिस को करनी चाहिए।
-साकेत के कैलाश हाकिम ने साफ शब्दों में कहा कि जो ट्रांसपोर्टर इस मुद्दे पर आज हमारा साथ नहीं दे रहे हैं, हमें उनका बहिष्कार करना चाहिए। चंद दिनों की दुकानदारी का हमें यदि बलिदान भी देना पड़े, तब भी हमें एकजुट होकर इस प्रकार के फरमानों का डटकर विरोध करना चाहिए।
-एसजीटीटीए के अध्यक्ष सुनीलकुमार जैन ने कहा कि चंद ट्रांसपोर्टर्स और कपड़ा बाजार में अलोकतांत्रिक संस्था के पांच आदमी मिलकर 65 हजार व्यापारियों के बारे में कोई भी फैसला नहीं ले सकते। ऐसी किसी भी परिस्थिति का हम कड़ा विरोध करते हुए बहिष्कार करते हैं।-सूरत टेक्सटाइल मार्केट के अध्यक्ष हरबंसलाल अरोरा ने कहा कि कई महीनों से कपड़ा बाजार लगातार मुश्किल के दौर से गुजर रहा है। ऐसे कठिन समय में विभिन्न घटकों के तरह-तरह के फरमान मिलते रहे हैं। सही मायने में कपड़ा बाजार के लिए यह अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण और दुखद स्थिति है। इसका पुरजोर विरोध होना चाहिए।
-व्यापारियों ने ली शपथ
एसजीटीटीए के सचिव सचिन अग्रवाल ने बैठक में सभी व्यापारियों को शपथ दिलवाई। इसमें पुराने सिस्टम से ही काम करेंगे। कोई भी अलोकतांत्रिक संस्था इन यूनियनों के साथ अगर समझौता करती है तो कपड़ा व्यापारी उसे स्वीकार नहीं करेंगे। मार्केट के सभी व्यापारी एकजुट रहकर तीनों ट्रांसपोर्टर्स का बहिष्कार करेंगे। असंवैधानिक संस्था का कोई भी फरमान हमें स्वीकार नहीं है। जो ट्रांसपोर्टर्स और मुकादम इस मुहिम में हमारे साथ आए हैं, हम आगे भी उनके साथ व्यापार करते रहेंगे।
पार्सल का वजन 65 किलो तक मंजूर
सूरत. सूरत टेक्सटाइल गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन व सूरत जिला टेक्सटाइल मार्केटिंग लेबर यूनियन की सूरत कपड़ा मंडी की व्यापारिक संस्था फोस्टा के साथ बुधवार को जरूरी बैठक हुई। बैठक में पार्सल के वजन को 55 किलो से बढ़ाकर 65 किलो तक किए जाने पर सहमति बनने की जानकारी दी गई है।सूरत टेक्सटाइल गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन व सूरत जिला टेक्सटाइल मार्केटिंग लेबर यूनियन ने पिछले दिनों संयुक्त बैठक कर निर्णय किया था कि 15 जनवरी से सूरत कपड़ा मंडी में 55 किलो से अधिक वजन के पार्सल की ढुलाई नहीं की जाएगी। इसके बाद सोमवार से ही एसोसिएशन व यूनियन के निर्णय का असर सूरत कपड़ा मंडी में दिखाई देने लगा था। टेक्सटाइल मार्केट्स में व्यापारिक प्रतिष्ठानों से 55 किलो से अधिक वजन से पार्सल की ढुलाई रोकने के मामले में कपड़ा व्यापारियों में भी नाराजगी फैल गई थी। इस मामले में व्यापारिक संगठन फोस्टा व दोनों संगठन के बीच बैठकों के दौर चले। बुधवार शाम हुई बैठक में दोनों ने सहमति से 65 किलो तक पार्सल की ढुलाई को मान्य रखा है।
Published on:
18 Jan 2023 09:30 pm
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