खुले में सोने को मजबूर यात्री, रैन बसेरे की दरकार
Traveler forced to sleep in the open…रेलवे स्टेशन प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने की वजह से रेलवे स्टेशन के बाहर नगरपालिका की ओर से रैन बसेरा शुरू नहीं हो सका। इससे रात्रि के समय बेसहारा व यात्रियों को खुले आसमान के नीचे मजबूरन सोना पड़ रहा है।
खुले में सोने को मजबूर यात्री, रैन बसेरे की दरकार
सूरतगढ़ (श्रीगंगानगर). क्षेत्र में सर्दी का प्रकोप बढऩे पर नगरपालिका की ओर से नए बस स्टेण्ड व बीएसएनएल ऑफिस के पास सामुदायिक भवन में रैन बसेरा शुरू कर दिया है। लेकिन रेलवे स्टेशन प्रशासन की अनुमति नहीं मिलने की वजह से रेलवे स्टेशन के बाहर नगरपालिका की ओर से रैन बसेरा शुरू नहीं हो सका। इससे रात्रि के समय बेसहारा व यात्रियों को खुले आसमान के नीचे मजबूरन सोना पड़ रहा है।
नगरपालिका की ओर से सर्दी बढऩे के साथ ही नए बस स्टेण्ड में स्थित एक कमरे व बीएसएनएल ऑफिस के पास सामुदायिक भवन में रैन बसेरा शुरू कर दिया है। यहां रजाइयां, गद््दे, आग जलाने के लिए लकडिय़ा, मेडिकल किट, गर्म पानी की व्यवस्था उपलब्ध है। हालही में शुरू हुए रैन बसेरो में फिलहाल अभी तक रात्रि के समय कोई भी यात्री ठहराव नहीं कर रहा है।
रेलवे का इनकार
रेलवे स्टेशन के मुख्य गेट के बाहर प्रति वर्ष सर्दी के समय नगरपालिका की ओर से अस्थाई रैन बसेरा लगता है। इस बार रेलवे प्रशासन ने मुख्य गेट पर यात्रियों की आवाजाही के मद्देनजर रैन बसेरा लगाने से नगरपालिका को इनकार कर दिया है।
रेलवे अधिकारियों की माने तो मुख्य गेट की बजाए अन्य स्थान चिन्हित करके रैन बसेरा को जगह दी जाएगी। वही गत पांच दिनों से सर्दी का प्रकोप बढऩे पर रेलवे स्टेशन से बेसहारा व यात्रियों के ठहराव के लिए जगह उपलब्ध नहीं होने की वजह से मजबूरन खुले आसमान के नीचे उन्हें सोना पड़ रहा है।
शुरू होना चाहिए रैन बसेरा
नगरपालिका के नवनिर्वाचित पार्षद मदन ओझा, पूर्व पार्षद लक्ष्मण शर्मा, महावीर भोजक आदि ने बताया कि लम्बे समय से सर्दी के मौसम में रेलवे स्टेशन के बाहर अस्थाई रैन बसेरे का संचालन होता है। लेकिन इस बार हाडक़म्पा देने वाली सर्दी के बावजूद रैन बसेरा चालू नहीं हो सका है। इस वजह से बेहारा, राहगीरों व यात्रियों को मजबूरन खुले आसमान के नीचे ठिठुरना पड़ रहा है। रेलवे प्रशासन व नगरपालिका प्रशासन को आपसी सहमति से यहां रैन बसेरा शुरू करना चाहिए।
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