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श्रीगंगानगर. इन दिनों यदि आप बीमार हो तो जिला चिकित्सालय में भर्ती से बचने का प्रयास करें, दरअसल जिला चिकित्सालय में भवन निर्माण का कार्य तेजी से हो रहा है। आइसीयू ओर अन्य वार्डो में दीवारों पर टाइल्स लगाने के लिए कारीगर ड्रील मशीन और हथोड़े से इतना अधिक शोर कर रहे है कि निर्माण कार्य की दीवारों से सटे कमरों में रोगी कंपकंपी करने लगे है। निर्माण सामग्री जैसे सीमेंट, रेता, पीओपी, पेंट उड़ने से गर्द रोगियों से मिलने वाले या उनके परिजनों को बीमार करने लगी है। जिला चिकित्सालय की दूसरी मंजिल में जहां देखों वहां निर्माण कार्य चल रहा है, इस निर्माण सामग्री के कारण हवा में प्रदूषण इतना अधिक बढ़ गया है कि स्वस्थ माने जाने वाले लोगों को भी बीमार बनाने की स्थिति में आ गए है।
क्षय रोग में बनाया अस्थायी आईसीयू
आईसीयू को दुबारा जीर्णोद़धार कराने के लिए वहां रोगियों को चंद कदम पर क्षय रोग के पांच बैड वाले कक्ष में शिफ़ट किया गया है, इस वैकल्पिक व्यवस्था में भी लापरवाही सामने आई है। नर्सिग करने वाले स्टूडेँटस से रोगियों की देखभाल कराई जा रही थी। नर्सिग स्टाफ दूसरे कक्ष में ठंडी हवा में बैठे नजर आए। वैकल्पिक आईसीयू का कक्ष भी बंद करने की बजाय खोल रखा था ऐसे में धूल के गुब्बार वहां देखे जा सकते थे। इससे संक्रमण फैलने की अधिक आंशका बनी हुई थी। यही हाल फिमेल मेडिकल वार्ड की हालत थी, इस वार्ड के आधे हिस्से में निर्माण कार्य चल रहा था तो दूसरे हिस्से में रोगी भर्ती थे। इन रोगियों की सार संभाल भी रामभरोसे नजर आई।
यहां एक बैड पर दो दो रोगी
मेल मेडिकल वार्ड में बैड की क्षमता 26 है लेकिन वहां सुबह 31 रोगी भर्ती थे। दोपहर होते होते यह संख्या 28 तक रह गई। वहां कार्यरत नर्सिग स्टाफ ने एक बैड पर दो दो रोगियों को भर्ती करने की मजबूरी बताई। इसके अलावा फिमेल मेडिकल के बाहर गैलरी में बैड लगाए हुए थे। इसकी वजह भवन निर्माण होना बताया। इन बैड की सफाई नहीं होने के कारण संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ था। फिमेल मेडिकल वार्ड एक में 22 बैड के मुकाले 28 रोगी भर्ती मिले। फिमेल मेडिकल वार्ड बी में 14 बैड थे, रोगी नौ भर्ती थे। नेत्र रोग वार्ड में 23 बैड के मुकाबले 70 रोगी भर्ती थे।
ताले में बंद शौचालय की सुविधा
मेल मेडिकल और अन्य वार्डो के लिए सार्वजनिक शौचालय पर ताले लगे हुए थे। इन गेटों के बाहर गंदगी इतनी कि मानो कभी सफाई नहीं हुई। इधर, कोटेज बिल्डिंग के बाहर भवन निर्माण के दौरान निकाला गया मलबा लगा हुए था। इस मलबे के ढेर को ठेकेदार ने पिछले तीन माह से उठाव नहीं किया है। चिकित्सालय मैनेजर ने रटारटाया जवाब दिया कि निर्माण कार्य के ठेकेदार को यह समस्या के लिए जिम्मेदार बताकर अपना पल्ला झाड़ लिया।