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मिर्जेवाला का जगदीश हत्याकांड: अवैध संबंधों मे विलेन बना पति तो गला घोंटा हत्या कर नहर में फेंका

- कोर्ट ने पत्नी और उसमे प्रेमी समेत तीन को सुनाई उम्रकैद की सजा

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श्रीगंगानगर. अवैध संबंधों में अड़चन बने पति को ठिकाना लगाने के लिए हत्या कर शव को नहर में फेंकने के मामले में अदालत ने मृतक की पत्नी, पत्नी के प्रेमी और प्रेमी के सगे भाई को दोषी मानते हुए आजीवन कारावास व 45 हजार रुपए जुर्माने की सजा से दंडित किया है। यह निर्णय मंगलवार को अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय संख्या एक महेन्द्र के सोलंकी ने सुनाया। परिवादी के वकील जसवंत सिंह भादू ने बताया कि 4 जुलाई 2019 को मटीलीराठान पुलिस थाने में मिर्जेवाला गांव निवासी 70 वर्षीय गोकुल राम मेघवाल ने मामला दर्ज कराया था। इसमें बताया कि उसका लड़का जगदीश अपने परिवार के साथ अलग रहता है। जगदीश की अपने ताऊ के बेटे पालाराम मेघवाल के साथ अनबन रहती लेकिन पालाराम के अवैध संबंध जगदीश की पत्नी शंकुतला उर्फ शकु के साथ थे। पालाराम और शंकुतला को कई बार समझाया भी था। 2 जुलाई 2019 को जगदीश जब वापस घर नहीं लौटा तो उसकी तलाश की गई। शंकुतला पर शक हुआ तो उससे पूछताछ की गई तो उसने एफ नहर के पास छोटी नहर एरिया में जगदीश के हाेने के बारे में बात बताई। जब पुलिस और ग्रामीणों ने एफ नहर के पास छोटी नहर में कम पानी होने की वजह से शव वहां पड़ा हुआ मिला। पुलिस ने इस मामले की जांच की ताे खुलासा हुआ कि मृतक के ताऊ के बेटे पालाराम का शंकुतला उर्फ शंकु के साथ अवैध संबंध थे। इन दोनो ने जगदीश का गला चुन्नी से बताया और मृत्यु होने के उपरांत पालाराम ने अपने सगे भाई सरवन राम की मदद से चादर में डाल कर शव को एफ नहर के पास छोटी नहर में फेंक दिया। पुलिस ने इस मामले में गांव मिर्जेवाला निवासी मृतका की पत्नी शंकुतला उर्फ शकु, पालाराम और सरवन राम को गिरफँॅ्तार कर अदालत में चालान पेश किया। अदालत ने आरोपियों शंकुतला उर्फ शकु पत्नी जगदीश, प्रेमी पालारााम और सरवन राम को दोषी मानते हुए हत्या करने के जुर्म में आईपीसी की धारा 302 में प्रत्येक को आजीवन कारावास व दस-दस हजार रुपए जुर्माना, हत्या का साक्ष्य छुपाने के लिए आईपीसी की धारा 201 में सात -सात कारावास व पांच-पांच हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।