12 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

गोलिया बस्ती: महिलाएं करती नालियों की सफाई, खुले में शौच को विवश बाशिन्दे, रात में रहता अंधेरा

बस्ती में अधिकांश परिवार पशुपालक व किसान… आबूरोड . क्षेत्र की आमथला ग्राम पंचायत की गोलिया बस्ती के बाशिन्दे बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में सफाई व्यवस्था को बेहतरीन बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन यहां स्वच्छता अभियान भी प्रभावी तरीके से कारगर साबित […]

2 min read
Google source verification
आबूरोड. समस्याओं की जानकारी देते गोलिया बस्ती के बाशिंदे।

आबूरोड. समस्याओं की जानकारी देते गोलिया बस्ती के बाशिंदे।

बस्ती में अधिकांश परिवार पशुपालक व किसान...

आबूरोड . क्षेत्र की आमथला ग्राम पंचायत की गोलिया बस्ती के बाशिन्दे बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं। सरकार स्वच्छ भारत मिशन के तहत गांवों में सफाई व्यवस्था को बेहतरीन बनाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है, लेकिन यहां स्वच्छता अभियान भी प्रभावी तरीके से कारगर साबित होता नजर नहीं आ रहा। बस्ती में एक कचरा-पात्र तक नहीं है। यहां की महिलाएं खुद नाली की सफाई करती हैं। बस्ती में प्रवेश के दोनों रास्तों पर गंदा पानी फैला रहता है। शौचालय सुविधा से वंचित परिवारों की महिलाएं व पुरुष खुले में शौच जाने को मजबूर है। करीब 1500 मतदाता वाली इस बस्ती में रात में रास्तों पर अंधेरा पसरा रहता है। पेयजल व्यवस्था ठीक है, क्योंकि ग्रामीण खुद अपने स्तर पर राशि जुटाकर जलापूर्ति स्कीम की व्यवस्था संभाले हुए हैं।

जलाना पड़ता है कचरा

बस्ती की 60 वर्षीय नैनी बाई ने बताया कि कचरा संग्रहण के लिए कभी-कभी ट्रैक्टर-ट्रॉली आती है। इसलिए कचरा एकत्र होने पर हमें जलाना पड़ता है। नालियां टूट गई है। इससे मार्ग पर पानी फैल जाता है। महिलाएं खुद नालियों की सफाई करती हैं। इस काम में कई बार बच्चे सहयोग करते हैं। रोड की सफाई नियमित नहीं होती। बस्ती में एक भी कचरा-पात्र नहीं है। कचरापात्र हो तो हम उनमें कचरा डाल सकते हैं।

खुले में शौच को मजबूर, मनरेगा में काम नहीं मिल रहा

60 साल के बाबू देवासी ने बताया कि यहां महिलाओं व पुरुषों के लिए सार्वजनिक शौचालय नहीं है। जिनके घरों में शौचालय नहीं है, उन परिवारों की महिलाएं व पुरुष खुले में शौच जाते हैं। करीब सालभर पहले बस्ती की करीब 50 महिलाओं को मनरेगा में काम मिला था, लेकिन आज वे घर बैठी है। 55 साल के जोधाराम देवासी ने बताया कि सफाई, सड़क व रोड लाइट संबंधी समस्याओं से पंचायत प्रशासन व अधिकारियों को कई बार अवगत करवाया है। ग्रामीणों ने बताया कि जनप्रतिनिधि समस्याओं के निवारण का भरोसा दिलाकर चले जाते हैं, समाधान नहीं होता।

वन क्षेत्र में अंतिम संस्कार को मजबूर

ग्रामीणों ने बताया कि वे बस्ती के निकट मुक्तिधाम निर्माण की कई बार मांग कर चुके हैं। किसी व्यक्ति का निधन होने पर उन्हें दो किलोमीटर दूर मुखरीमाता मंदिर के पास वन क्षेत्र में अंतिम संस्कार के लिए जाना पड़ता है। हम चाहते हैं यहां मुक्तिधाम बनाया जाए।

इनका कहना

गांवों में पुता सफाई व्यवस्था के लिए पंचायतों के ग्राम विकास अधिकारियों को निर्देशित कर रखा है। कहीं सफाई में कमी है तो ठेकेदार फर्म को नोटिस देकर पाबंद करने को कहा है। गोलिया में सफाई आदि समस्याओं के निवारण के लिए जरूरी कदम उठाए जाएंगे।

पुखराज सरेल, विकास अधिकारी, पंचायत समिति, आबूरोड

गोलिया में सीवरेज कार्य के दौरान सड़क व नालियां टूट गई थी। काम पूरा होेने पर रूडीप ने मरमत करवाने का कहा है। कचरा-पात्र के लिए शीघ्र टेंडर आमंत्रित किए जाएंगे। कारोली व गोलिया में रोड लाइट के लिए कार्रवाई चल रही है। एसएफसी फंड से यह कार्य करवाया जाएगा। कचरा संग्रहण के लिए ट्रैक्टर- ट्रॉली भेजी जाती है।

आर्यन भारद्वाज, ग्राम विकास अधिकारी, ग्राम पंचायत, आमथला

गोलिया में कचरा संग्रहण के लिए एक दिन छोड़कर ट्रैक्टर- ट्रॉली जा रही है। यहां होली पर नालियों की सफाई करवाई थी। राजस्व गांव होने से पहले कारोली गांव व इसके बाद गोलिया बस्ती में रोड लाइटें लगवाई जाएगी। कार्रवाई चल रही है। नालियों व सड़क की मरमत के लिए रूडीप को पत्र लिखा है। दिनेश कुमार, सरपंच, ग्राम पंचायत, आमथला