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120 वर्ष पुरानी है उमरिया की यह कोठी, अंग्रेज अधिकारी यहां करते थे विश्राम, स्वतंत्रता सेनानियों को भी यहां किया गया था नजरबंद

प्राचीन इमारतों का अन्वेषण कर रहे प्रदीप सिंह ने बताया ऐतिहासिक महत्वकोठी के पीछे है अण्डरग्राउण्ड कक्ष अभी भी बना है मुहाना

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120 वर्ष पुरानी है उमरिया की यह कोठी, अंग्रेज अधिकारी यहां करते थे विश्राम, स्वतंत्रता सेनानियों को भी यहां किया गया था नजरबंद

120 वर्ष पुरानी है उमरिया की यह कोठी, अंग्रेज अधिकारी यहां करते थे विश्राम, स्वतंत्रता सेनानियों को भी यहां किया गया था नजरबंद

शहडोल. अंग्रेज शासकों ने कई इमारते बनवाई थी जो आज भी विद्यमान है। इन इमारतों का अंग्रेज शासकों के बाद राजा-महराजाओं ने भी उपयोग किया। जिसके बाद कुछ मध्य प्रदेश टूरिज्म बोर्ड के आधिपत्य में चली गई तो कुछ अभी भी रीवा रियासत के वंशजों के अधीन हैं। इनमें से एक नगर में स्थित पीली कोठी भी है। जिसका इतिहास काफी प्राचीन बताया जा रहा है। जिले की प्राचीन इमारतो पर अन्वेषण कर रहे प्रदीप सिंह गहलोत की माने तो यह पीली कोठी लगभग 120 वर्ष पुरानी है। इसका निर्माण 1901 में कराया गया था। उसी समय यहां शवालिश कंपनी के अंग्रेज अधिकारियों को आना था। साथ ही अंग्रेज अधिकारी की करीबी मोनिका जार्ज का यहां आगमन हुआ था। जानकारों की माने तो पीली कोठी का निर्माण प्राकृतिक सुंदरता व शुद्ध आवोहवा के बीच अंग्रेज अधिकारियों के विश्राम के उद्देश्य से कराया गया था। जो भी अंग्रेत अधिकारी या फिर उनके करीबी यहां आते थे तो वह यहीं पर विश्राम करते थे। इसके बाद इसका उपयोग रीवा रियासत के राजा महराजाओं के द्वारा शिकार गृह कि रूप में किया जाता था। जब भी वह शिकार के लिए आते थे तो यहीं पर ठहरते थे।
फायर क्ले टाइल्स का उपयोग
उमरिया से कछरवार रोड स्थित यह पीली कोठी अपने विशेष बनावट के लिए भी जानी जाती है। यह कोठी काफी ऊंची होने के साथ ही इसमें दो चिमनी लगी हुई है। साथ ही इसके अंदर फायर क्ले टाइल्स लगी हुई है। इसमें अलग-अलग कक्ष के अलावा एक बड़ा हाल भी है। चारो तरफ हरियाली के बीच बनी यह कोठी विशेष आकर्षण का केन्द्र भी है।
कुछ समय नजरबंद कर भेज दिया था रीवा
जिले की प्राचीन इमारतों को लेकर शोध कर रहे प्रदीप सिंह ने बताया कि पीली कोठी का उपयोग जहां अंग्रेज शासक अपने विश्राम गृह के रूप में उपयोग करते थे। वहीं आजादी के लड़ाई के दौरान यहां स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को कुछ समय के लिए नजरबंद किया गया था। हालांकि बाद में उन्हे रीवा भेज दिया गया था। इन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में पं. शंभूनाथ शुक्ल का नाम प्रमुख था।
बना रखा था अण्डरग्राउंड कक्ष
पीली कोठी के ठीक पीछे एक मुहाड़ा भी स्थापित है। जिसे फिलहाल बंद कर दिया गया है। जानकारों की माने तो यह मुहाड़ा अण्डरग्राउण्ड कक्ष का प्रवेश द्वार था। गर्मी के दिनो में अंग्रेज अधिकारी यहीं पर विश्राम करते थे। साथ ही यहां एक बड़ा डाइनिंग हाल भी बना हुआ था। बहराहल इसे पूरी तरह से बंद कर दिया गया है।