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शुभम बघेल@शहडोल
सपनों को हकीकत में किस तरह बदला जाता है, ये मां से ही सीखने को मिला। मां ने ही हर पल हौसला दिया और आगे बढऩे के लिए हिम्मत दी। लोगों ने तरह- तरह के ताने भी दिए लेकिन किसी की न सुनी। मां का सहारा न होता तो शायद कभी सपने को हकीकत में नहीं बदल पाता। ये मानना है मध्यप्रदेश पीएससी में दो बार टॉप करने वाले डिप्टी कलेक्टर सतीश राय का। बचपन से ही औसत छात्र रहने वाले सतीश राय का 8वीं में रिजल्ट सप्लीमेंट्री आ गया था लेकिन मां के मजबूत इरादों के सामने उतार -चढ़ाव ने भी हार मान ली। मां ने हिम्मत दी, लोगों के ताने को झुठलाया और गांव-गांव घूमकर पढ़े लिखे लोगों से पढ़ाने के लिए मिन्नतें की। आखिरकार सतीश राय ने 8वीं की दोबारा परीक्षा दी और पास हो गए। यह सिलसिला यहीं खत्म नहीं हुआ। सतीश राय कहते हैं, मां का सपना था कि गांव से बड़ा अफसर बनकर निकलूं। हर बार मां की उम्मीदें सामने आती थी। तमाम चुनौतियां भी आई लेकिन मां के अडिग हौसलों से हिम्मत मिलती गई और मध्यप्रदेश पीएससी में एक नहीं दो बार टॉप किया। सतीश राय वर्तमान में शहडोल डिप्टी कलेक्टर हैं।
घर में पैसों का संकट, पाई-पाई जोड़ मां ने पढ़ाया
सतीश राय बताते है कि परिवार में आर्थिक समस्या बड़ी वजह थी। बड़ामलेहरा गांव में सरकारी स्कूल और नवोदय में में किसी तरह पढ़ाई की। बाद में आगे की पढ़ाई में आर्थिक मजबूरी थी। मां ने हार नहीं मानी और पाई-पाई जोड़कर स्नातक की पढ़ाई पूरी कराई।
यूपीएससी प्री-मेंंस क्लीयर, कई नौकरी भी छोड़ी
बिना कोई कोचिंग के दो बार पीएससी टॉप करने वाले सतीश राय के अनुसार, कॉलेज के बाद ही एसएससी और बंैक अधिकारी में चयन हो गया था। इसके बाद धीरे-धीरे आर्थिक स्थितियों में सुधार आया। बाद में दोनों नौकरी छोड़ दी। सतीश एमपीपीएससी 2012 और 2014 में टॉप के साथ यूपीएससी में प्री और मेंस परीक्षा भी निकाल चुके हैं।
सप्लीमेंट्री के बाद लोगों ने कहा, छुड़वा दो पढ़ाई लेकिन नहीं हारी हिम्मत
बड़ामलेहरा निवासी सतीश राय की मां नर्मदा राय बताती हैं, 8वीं में सप्लीमेंट्री के बाद लोगों ने पढ़ाई छुड़वाने के लिए भी कहा लेकिन सपना अफसर बनाने का था। कई लोगों से पहले साझा थी किया तो लोग मजाक समझते थे। बाद में बेटे ने प्रदेश में दो बार टॉप कर सबको गौरवन्वित किया।
Published on:
12 May 2019 12:29 pm

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