
oil mill me tel kaise banta hai sarso ke tel ka business
सतना। औद्योगिक क्षेत्र स्थित महालक्ष्मी तेल कंपनी में गत बुधवार को पुलिस, औषधि व खाद्य विभाग तथा नापतौल विभाग ने एक साथ कार्रवाई की। शुरुआती दौर में जितनी बड़ी कार्रवाई दिखाने का प्रयास हुआ, वैसे सख्त कदम नहीं उठाए गए। कार्रवाई ने सरकारी अधिकारियों की भूमिका पर ही सवाल खड़ा कर दिया है। मिलावाट, डुप्लीकेसी व नक्काली का मामला प्रथमदृष्ट्या आने के बाद भी लीपापोती कर दी गई। सबसे ज्यादा संदेह के दायरे में औषधि एवं खाद्य विभाग की टीम है।
हकीकत कुछ ऐसी है। जब कार्रवाई शुरू हुई तो जांच के दौरान कंपनी के अंदर 500 से ज्यादा तेल के डिब्बे भरे थे। ये डिब्बे कंपनी के खुद के ब्रांड के नहीं थे बल्कि दूसरी कंपनियों के ब्रांड के थे। इसके बाद औषधि और खाद्य विभाग के साथ-साथ पुलिस टीम ने निर्णय लिया कि इन डिब्बों की जब्ती व सैंपलिंग की जाए और कंपनी के सुपुर्द कर दिया जाए, ताकि प्रकरण को मजबूत किया जा सके।
लेकिन, खाद्य निरीक्षक ने खेल कर दिया। उन्होंने मौके से केवल 15 डिब्बों की जब्ती बनाते हुए कंपनी की सुपुर्दगी दिखाई। इसके लिए कंपनी से लेनदेन का खेल हुआ। सिटी मजिस्ट्रेट और कलेक्टर को भ्रम में रखा गया। सैम्पलिंग, जब्ती होना तो बताया गया पर वास्तविक मात्रा छिपा दी गई।
ऐसे बचाया कंपनी को
मौके पर 3000 से ज्यादा खाली डिब्बे भी थे। जो दूसरी कंपनियों के ब्रांडेड नाम से थे। मौके पर अन्य कंपनी के नाम के ब्रांड के डिब्बे में भरा हुआ तेल था। इससे साफ जाहिर था कि कंपनी संचालक मिलावटी व लोकल तेल को अन्य कंपनियों के ब्रांड से मिलाकर नकल कर रहा है और बाजार में सप्लाई कर रहा। इसके तहत प्रथम दृष्ट्या ही औषधि व खाद्य विभाग द्वारा मिथ्या छाप का प्रकरण दर्ज करना था। लेकिन, ऐसा नहीं किया गया। इसकी जगह नापतौल विभाग के तहत कार्रवाई कराई गई। औषधि व खाद्य विभाग के तहत कार्रवाई होती और कोर्ट में प्रकरण साबित होता तो संचालक को जेल की सजा तक हो सकती थी। इस तरह अधिकारियों ने संचालक पर मेहरबानी दिखाई।
सीज क्यों नहीं हुई कंपनी
प्रथमदृष्ट्या स्पष्ट था कि संचालक द्वारा मिलावट, नक्काली, डुप्लीकेसी की जा रही है। इसका आशय स्पष्ट है कि ऐसा करना मानव जीवन के लिए खतरनाक है। सीधेतौर पर सेहत को खतरे में डाला जा रहा है। लिहाजा, कंपनी को सीज कर देना चाहिए था। औषधि व खाद्य विभाग के पास यह अधिकार भी था या फिर विहित अधिकारी मौके पर पहुंचकर ऐसा कर सकते थे। लेकिन, आमजन के जीवन को खतरे में डालने वाली कंपनी को सीज नहीं किया गया।
नाम के ब्रांड रजिस्ट्रेशन
कंपनी के संचालक नरेंद्र जनवानी ने जांच के दौरान बताया था कि परिवार, स्टार, शाही फूल व राजहंस सहित अन्य ब्रांड रजिस्टर्ड हैं। लेकिन, मौके पर उनके ब्रांड के भरे हुए डिब्बे नाममात्र के मिले। जबकि मुरैना के घानी सहित अन्य ब्रांड के डिब्बे बड़ी संख्या में पैक्ड रखे थे।
न जांच न नाप, सीधे मिलावट
कंपनी में तेल पदार्थ की गुणवत्ता जांचने के लिए कोई उपकरण मौजूद नहीं था। तकनीकी रूप से तेल की मात्रा भी जांचने के उपकरण मौजूद नहीं थे। केवल मैन्युअल काम हो रहा था। इस दौरान खाद्य सुरक्षा के नियमों का उल्लंघन भी किया जा रहा था पर इस ओर ध्यान तक नहीं दिया गया।
जिन डिब्बों में कंपनी के नाम का उल्लेख नहीं था उसे जब्त किया गया है। अन्य को छोड़ दिया गया है।
शीतल सिंह, औषधि एवं खाद्य निरीक्षक
Published on:
23 Feb 2019 02:05 pm

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