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अगर किसी एक मंत्री पद लायक नेता को जिता देते तो प्रशासनिक उपेक्षा नहीं होती

प्रभारी मंत्री ने कार्यकर्ताओं को दिखाया आइना

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सतना

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Suresh Mishra

Dec 31, 2019

In-charge minister communicated to Congress officials at Circuit House

In-charge minister communicated to Congress officials at Circuit House

सतना/ प्रभारी मंत्री लखन घनघोरिया ने सर्किट हाउस में कांग्रेस पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की बैठक लेकर उनसे संवाद किया। उन्होंने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की शिकायत पर दो टूक जवाब दिया कि अगर आप लोग यहां के किसी एक मंत्री पद लायक नेता को जिता देते तो ऐसी प्रशासनिक उपेक्षा नहीं होती। बैठक में कांग्रेस के जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष फिर कार्यकर्ताओं के निशाने पर रहे।

प्रभारी मंत्री की सर्किट हाउस में बैठक के दौरान कांग्रेसियों ने कहा कि प्रशासन में हम लोगों की सुनवाई नहीं होती। इस पर घनघोरिया ने कहा कि अगर आप लोगों ने मंत्री पद लायक किसी नेता को जिता दिया होता तो यह स्थिति नहीं रहती। उस स्थिति में प्रशासनिक कसावट रही आती और आप लोगों की भी सुनी जाती। हमारे यहां दो-दो मंत्री हैं, देखिये वहां समस्या नहीं है। हालांकि अभी तक भाजपाई कूदते रहे कि सरकार अब जाने वाली है, अधिकारी भी भ्रम में थे।

अब सरकार में स्थिरता आ गई है। अधिकारियों को भी यह सब दिखने लगा है। जल्द ही सब ठीक हो जाएगा। हालांकि इस बयान के बाद बाहर एक नई चर्चा ने जन्म ले लिया। कांग्रेसी ही सर्किट हाउस में यह कहते सुने गए कि क्या सतना विधायक मंत्री पद लायक नहीं है? कुल मिलाकर मंत्री के इस बयान के बाद अब कांग्रेस के अंदर खाने की राजनीति जल्द ही गरमाने वाली है। चर्चा यह भी रही कि प्रभारी मंत्री का इशारा राजेन्द्र सिंह की ओर था।

अनदेखी का मुद्दा उठा
पार्टी में बैठक के दौरान ही महिला कांग्रेस नेत्रियों ने अपनी अनदेखी का मुद्दा उठाया। डाली चौरसिया ने कहा कि यहां पार्टी पदाधिकारी महिला कांग्रेस की अनदेखी करते हैं। प्रभारी मंत्री ने जब इससे इंकार किया तो समर्थन में महिला कांग्रेस जिलाध्यक्ष गीता सिंह ने कहा कि यह सही है। यहीं देख लीजिए। अपने संबोधन में जिलाध्यक्ष ने सबका नाम लिया लेकिन महिला कांग्रेस का नाम नहीं लिया। ये दोनों कभी महिला कांग्रेस को महत्व नहीं देते हैं। मंच में स्थान तक नहीं दिया जाता है।

एकला की राजनीति पर भड़का गुस्सा
सर्किट हाउस में ज्यादातर कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता जिलाध्यक्ष और शहर अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पर जमकर भड़के। स्थिति यहां तक हो गई कि प्रभारी मंत्री को अधिकारियों की बैठक छोड़ कर बाहर आना पड़ा। कांग्रेसियों ने कहा कि हर बार आप इन दो पदाधिकारियों के साथ ही बात करते हैं। हम सबको अलग से इनकी अनुपस्थिति में मुलाकात करनी है और चर्चा करनी है। जिलाध्यक्ष भर थोड़ी कांग्रेस हैं। तब प्रभारी मंत्री ने समझाइश देते हुए लोगों का गुस्सा शांत कराया।

जिला और शहर अध्यक्ष के खिलाफ नाराजगी
बैठक में कार्यकारी अध्यक्ष दिनेश दुबे ने कहा कि अब कांग्रेस की सरकार आ गई है उसके बाद भी विधि की राजनीतिक नियुक्तियों पर कोई काम नहीं हो रहा है। भाजपा के लोग बैठे हुए हैं। इस पर प्रभारी मंत्री ने कहा कि आप लोग सूची तैयार करें, जिस पर दुबे ने खुद को विधि प्रकोष्ठ का अध्यक्ष बताते हुए जब सूची की बात पर चर्चा शुरू की तो शहर अध्यक्ष मकसूद अहमद ने कहा कि सूची बनी हुई है। इस पर दुबे ने कहा कि यहीं देख लीजिये अकेले बना कर बैठे हैं। किसी से कोई चर्चा तक नहीं हो रही है। जिस प्रभारी मंत्री ने कहा कि विधि प्रकोष्ठ के अध्यक्ष के साथ शहर अध्यक्ष बैठ कर इस पर निर्णय लें।