सागर

सिंधी समाज का चेट्रीचंड्र त्यौहार 30 मार्च को, सागर के इस मंदिर होगा भव्य आयोजन

Chetrichandr festival: सिंधी समाज 30 मार्च को झूलेलाल जयंती हर्षोल्लास से मनाएगा। इसे चेट्रीचंड्र के नाम से जाना जाता है।

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Mar 20, 2025

Chetrichandr festival: चैत्र शुक्ल द्वितीया से सिंधी नववर्ष की शुरुआत होती है, जिसे चेट्रीचंड्र के नाम से जाना जाता है। यह पर्व सिंधी समाज के इष्टदेव भगवान झूलेलाल के अवतरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष झूलेलाल जयंती 30 मार्च, रविवार को मनाई जाएगी। इसे लेकर सागर के संत कंवरराम वार्ड स्थित झूलेलाल मंदिर में तैयारियां जोरों पर हैं।

जय माता दी झूलेलाल शरण मंडली के संस्थापक लालाराम मेठवानी ने बताया कि भगवान झूलेलाल का 25 मार्च को अभिषेक सुबह 8:30 बजे झूलेलाल मंदिर में किया जाएगा। इसके बाद 26 मार्च को मनोकामना पूर्ण बहराणा साहब की शोभायात्रा निकाली जाएगी, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होंगे। 28 मार्च को विशेष महिला वाहन रैली सुबह 8 बजे निकलेगी। इस रैली में शामिल महिलाओं को आकर्षक गिफ्ट भी दिए जाएंगे।

30 मार्च को प्रभात फेरी व भव्य महाआरती

झूलेलाल जयंती के मुख्य दिन 30 मार्च को प्रातः 5:30 बजे झूलेलाल मंदिर से भात फेरी निकाली जाएगी, जो पूरे वार्ड का भ्रमण कर वापस झूलेलाल मंदिर पहुंचेगी। इसी दिन रात्रि 8 बजे मंदिर में महाआरती, पल्लव और केक काटकर उत्सव मनाया जाएगा। इस आयोजन में सिंधी पंचायत अध्यक्ष भीष्म राजपूत, महिला मंडल अध्यक्ष दिया राजपूत, लीला आहूजा, कविता लहरवानी, रैना बॉस गोकलानी और मानसी दरयानी सहयोग करेंगी।

सिंधु संस्कार समिति का विशेष योगदान

सिंधु संस्कार समिति के संस्थापक राजेश मनवानी ने बताया कि झूलेलाल मंदिर की अखंड ज्योति सिंध (अब पाकिस्तान) से लाई गई थी, जो आज तक प्रज्ज्वलित है इस ज्योति के लिए मंदिर के कार्यकर्ता शुद्ध घी, सरसों के तेल और विशेष बाती का ध्यान रखते हैं ताकि यह कभी बुझ न पाए। भगवान झूलेलाल की पूजा जल व ज्योति के रूप में किए जाने की परंपरा है। मान्यता है कि ज्योति के समक्ष श्रद्धा भाव से पल्लव लेकर जो भी मन्नत मांगी जाती है, वह पूरी होती है। इसी आस्था के साथ सिंधी समाज भगवान झूलेलाल की जल व ज्योति के रूप में पूजा करता है।

Published on:
20 Mar 2025 03:03 pm
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