अटल बिहारी मंदिर, देव राघव मंदिर, महाकाली मंदिर सहित अन्य मंदिरों में हुई होली
सागर . पांच दिवसीय रंगोत्सव का समापन रंगपंचमी के साथ बुधवार को हो गया। मिनी वृंदावन कहे जाने वाले देव राघवजी मंदिर में खूब रंग-गुलाल बरसा। शहर के प्रमुख मंदिरों देव राघवजी मंदिर, देव अटलबिहारी सरकार मंदिर सहित अनेक मंदिरों में भी रंगपंचमी पर भक्ति का रंग जमा। भक्तों ने भगवान को गुलाल अर्पण कर आपस में अबीर गुलाल उड़ाते हुए भजनों पर नृत्य किया। मंदिर में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ी। दूसरी तरफ बुंदेलखंड की पारंपरिक फागों का टेक के साथ गायन करतीं मंडलियों ने नगडिय़ा व ढोलक की थाप पर सुमधुर तान छेड़ी।
सैकड़ों क्विंटल रंग व गुलाल बरसाबड़ा बाजार स्थित देव अटल बिहारी मंदिर व देव राघवजी मंदिर में नजारा वृंदावन की तरह दिखाई दिया। बिहारीजी मंदिर में मंदिर पुजारी अमित चाचोंदिया ने पिचकारी से भक्तों पर रंग बरसाया। वहीं देव राघव मंदिर में पुजारी निताई दास ने ही छत से भक्तों पर रंग गुलाल की बारिश की। मंदिर परिसर में भक्त भजनों पर नृत्य करते रहे। पुजारी ने बताया कि सुबह ठाकुरजी का पांच नदियों के जल से अभिषेक किया गया। उसके बाद गुलाल से तिलक किया गया। दोपहर में भक्तों द्वारा शुरु हुआ रंगपंचमी उत्सव शाम तक चलता रहा। करीब 60 किलो गुलाल से होली खेली गई।
नर्तकियों ने राई और बधाई से समां बांधाशहर के राजीवनगर वार्ड में स्थित श्रीराम जानकी पटैल मंदिर करीला धाम में रंगपंचमी पर भगवान श्रीराम दरबार, माता जानकी, लव-कुश एवं महर्षि वाल्मीकि का सुबह विशेष पूजन अर्चन किया गया। उसके बाद मंदिर के समीप बने विशाल मंच पर नर्तकियों ने बधाई एवं राई नृत्य किया। यहां मेले में बड़ी संख्या में भक्त उमड़ पड़े। भजनों की धुन पर नर्तकियों के नृत्य के साथ भक्त भी नृत्य करने लगे। यहां जो श्रद्धालु अपने बधाव व नृत्य करवाना चाहते हैं वे नर्तकियों को निछावर देकर अपनी मन्नतें पूरी होने पर हर्ष जाहिर करते हैं।