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28 वर्षों के बाद पुष्य नक्षत्र और स्वग्रही योग का शुभ संयोग, बाघ वाहन पर सवार होकर आ रही संक्रांति

सागर. मकर संक्रांति 28 वर्षों के बद शुभ योग में आ रही है। इस बार बाघ पर बैठकर संक्रांति आ रही है। इस बार पुष्य नक्षत्र और स्वग्रही योग का विशेष महत्व रहेगा। पुष्य नक्षत्र को अत्यधिक शुभ माना जाता है, जिससे दान-पुण्य और पूजा-पाठ का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है।

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सागर

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Reshu Jain

Jan 04, 2025

sankranti

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सूर्य के उत्तरायण होने से शुरू होंगे शुभ कार्य

सागर. मकर संक्रांति 28 वर्षों के बद शुभ योग में आ रही है। इस बार बाघ पर बैठकर संक्रांति आ रही है। इस बार पुष्य नक्षत्र और स्वग्रही योग का विशेष महत्व रहेगा। पुष्य नक्षत्र को अत्यधिक शुभ माना जाता है, जिससे दान-पुण्य और पूजा-पाठ का प्रभाव कई गुना बढ़ जाता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ ही शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए यह दिन आदर्श होगा। 14 जनवरी को दोपहर 3.17 बजे पुण्यकाल में गंगा गंगा और दान का विशेष महत्व रहेगा। पं. केशव महाराज ने बताया कि इस दिन सूर्य पूजा के साथ ही तिल, कंबल, मच्छरदानी, खिचड़ी, गुड़ का दान करने की परंपरा है। पूरे दिन दान-पुण्य, पूजा-पाठ और तीर्थ दर्शन कर सकते हैं। इस पर्व से जुड़ी विभिन्न मान्यताएं हैं। उन्होंने बताया कि जब सूर्य देव शनि की राशि मकर में प्रवेश करते हैं, तब मकर संक्रांति मनाई जाती है। सूर्य और शनि पिता-पुत्र हैं। शनि अपने पिता सूर्य को शत्रु मानता है, लेकिन एक मान्यता ये है कि मकर संक्रांति पर सूर्य अपने पुत्र शनि देव से मिलने उसके घर जाते हैं। पहली बार जब सूर्य शनि के घर गए थे, तब इनके बीच के मतभेद दूर हो गए थे।

सूर्य होगा उत्तरायण, शुभ काम होंगे शुरू

पं. मनोज तिवारी ने बताया कि मकर संक्रांति से सूर्य उत्तरायण हो जाता है। शास्त्रों में इसे देवताओं के दिन की शुरुआत माना जाता है। सूर्य के मकर राशि में आने से खरमास खत्म हो जाता है और मांगलिक कार्यों के लिए फिर से शुभ मुहूर्त मिलने लगते हैं। खरमास में विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, जनेऊ जैसे मांगलिक काम नहीं किए जाते हैं, लेकिन मकर संक्रांति के बाद ये शुभ काम फिर से शुरू हो जाएंगे।

शुभ संकेत ला रही संक्रांति

पं. रघु शास्त्री ने बताया कि इस बार मकर संक्रांति बाघ वाहन पर आई है और इसका उपवाहन अश्व है। यह संयोग ऋ षि, मुनियों और तपस्वियों के लिए विशेष रूप से अच्छा रहेहा। बाघ वाहन का अर्थ है साहस, शक्ति और आत्मनिर्भरता का उदय, जबकि अश्व उपवाहन गति और ऊर्जा का प्रतीक है। यही वजह है कि संक्रांति शुभ संकेत लेकर आ रही है।