रतलाम

एमपी में यहां आज भी हैं औरंगजेब के आतंक के निशान, देखें वीडियो

MP NEWS: मुगलों के सबसे ज्यादा क्रूर और विध्वंसक शासक औरंगजेब के आतंक से अवशेष मात्र रह गए सदियों पुराने मंदिर के पत्थर...।

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Mar 29, 2025

MP NEWS: मध्यप्रदेश के रतलाम जिले में आज भी एक ऐसा स्थान है जहां सदियों पहले औरंगजेब के मचाए हुए आतंक के निशान मौजूद हैं। मुगलों के सबसे ज्यादा क्रूर और विध्वंसक शासक औरगंजेब ने सदियों पहले यहां स्थित भव्य व विशाल मंदिर को तोड़ा था और आज भी भारतीय संस्कृति के प्रतीक मंदिर के अवशेष वीराने में वहां बिखरे हुए हैं। मंदिर का कुछ हिस्सा अभी भी टूटी फूटी हालत में है जिसे देखकर मंदिर की भव्यवता और और प्राचीनता का अंदेशा लगाया जा सकता है। पत्रिका रतलाम रिपोर्टर आशीष पाठक की खास रिपोर्ट…

देखें वीडियो-

वीराने में बिखरे पड़े भारतीय संस्कृति के निशान


रतलाम जिला मुख्यालय से 30 किमी दूर राजापुरा गढ़खंखाई माता जी का मंदिर है जो कि पूरे जिले में प्रसिद्ध है। लेकिन इसी मंदिर से 4 किमी. आगे जोधपुरा जाने वाले रास्ते पर जंगल में उच्चानगढ़ किले के करीब मां भद्रकाली का एक और मंदिर था जो औरंगजेब के आतंक का गवाह है। औरंगजेब ने इस मंदिर को तुड़वा दिया था लेकिन आज भी मंदिर के पत्थर वहां एक से डेढ़ किमी. के दायरे में बिखरे हुए हैं। अब भी उच्चानगढ़ किले के जंगलों में मां के खंडित मंदिर के अवशेष मौजूद है। जरूरत इनको एक कर प्राचीन संस्कृति को सहेजने की है।



16वीं शताब्दी से पहले का रहा मंदिर

ऐतिहासिक उच्चानगढ़ जो कि वर्तमान में राजापुरा के नाम से प्रसिद्ध है। यह राजा जस्सा महिड़ा सत्ता कि राजधानी रहा है। इतिहासकार प्रकाश गोस्वामी के अनुसार मंदिर का जितना हिस्सा अभी बचा है उसे देखने पर पता चलता है कि एक भी पत्थर में जोड़ नहीं है। इसका मतलब यह है यह मंदिर तब बनाया गया, जब पत्थरों को जोड़ने की संस्कृति नहीं आई थी। पत्थरों को जोड़ने के दौरान इंटरलॉकिंग भी नहीं की गई, जबकि ताजमहल को जोड़ने में भी इंटरलॉकिंग कारीगरी का उपयोग किया। इसका मतलब यह ताजमहल से भी पूर्व के समय का ये मंदिर रहा होगा। मंदिर में जो पत्थर हैं उस तरह के पत्थर रतलाम में होते ही नहीं। इसका मतलब इनको बाहर से लाया गया होगा।


ऐसे पहुंच सकते मंदिर में..

जब राजापुरा माता जी मंदिर पहुंचते है तो वहां से जोधपुरा जाने का मार्ग है। राजापुरा व जोधपुरा के बीच ही जब रोड गोल आकर में मुड़ती है व दो पहाड़ी के बीच में से होते हुए सड़क मार्ग से आगे बढ़ते है, तब बीच सड़क के एक तरफ माही नदी बहती है तो दूसरी तरफ मां का मंदिर जंगल में है। सड़क किनारे शिवलिंग स्थापित किया गया है। जिससे आने वाले भक्तों को पहचान रहे।

Updated on:
29 Mar 2025 05:59 pm
Published on:
29 Mar 2025 05:58 pm
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