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बुरा साया है, बैगा की पूजा में जाना जरूरी, अस्पताल से छुट्टी करवा कर गांव ले गए 19 बेहोश बच्चों को परिजन

माओवादी प्रभावित क्षेत्र खडग़ांव समीपस्थ ग्राम कट्टेपार से बार-बार बेहोशी की शिकायत पर शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती हुए 19 बच्चों को उनके परिजन रविवार को सुबह छुट्टी करा गांव ले गए हैं।

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बुरा साया है, बैगा की पूजा में जाना जरूरी, अस्पताल से छुट्टी करवा कर गांव ले गए 19 बेहोश बच्चों को परिजन

राजनांदगांव. माओवादी प्रभावित क्षेत्र खडग़ांव समीपस्थ ग्राम कट्टेपार से बार-बार बेहोशी की शिकायत पर शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती हुए 19 बच्चों को उनके परिजन रविवार को सुबह छुट्टी करा गांव ले गए हैं। ग्रामीणों ने कहा कि इन बच्चों के सुधार के लिए गांव में पूजा-अर्चना का बड़ा आयोजन हो रहा है, जिसमें इन्हें शामिल होना जरूरी है, तभी ये बच्चे सुधरेंगे। परिजनों के जिद के आगे इन बच्चों की देखभाल कर रहे डॉक्टर व अस्पताल प्रबंधन की एक नहीं चली और उन्हें छुट्टी दे दी गई।

जानकारी के अनुसार गांव में पिछले दिनों 26 जनवरी को बच्चों के उज्जवल भविष्य के लिए बैगाओं द्वारा पूजा-अर्चना की गई थी। यह पूजा-अर्चना गोड़ समाज द्वारा रखी गई थी। इस आयोजन में कुछ घर के लोग शामिल नहीं हुए थे। इसके बाद फरवरी में गांव के पटेल के घर की बच्ची को इस तरह अचानक ही बेहोशी शिकायत सामने आई। इसके बाद स्कूल में पढऩे वाले सभी बच्चों को इस तरह की शिकायत होने लगी। ये बच्चे कभी भी बेहोश होकर गिर जाते थे। चार-पांच मिनट बाद इन्हें होश आता है।

मानसिक रोग
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. शरद मनोरे की माने तो यह सामूहिक साइकोजनिक हिस्टीरिया है। अफवाह के कारण फैला हुआ डर, जो मानसिक रूप से कमजोर लोगों को होता है। सामान्यत: यह बीमारी युवा वर्ग के लोगों को होती है। लेकिन समूह में और बच्चों को कम ही होती है।

फिर रखी गई है पूजा
मिली जानकारी अनुसार जिस बैगा ने पूजा संपन्न कराया था, उसका कहना है कि पूजा में सभी लोग शामिल नहीं हुए इस वजह से देवी-देवता बच्चों को सता रहे हैं। उनकी शांति के लिए फिर पूजा करना पड़ेगा। इसी पूजा में शामिल होने के लिए अस्पताल में भर्ती हुए बच्चों को परिजनों ने छुट्टी कराकर ले गए हैं। बैगाओं ने ही डर फैलाया है कि कोई बुरा या काला साया है, जो बच्चों को परेशान कर रहा है। इससे बचने के लिए ही पूजा-अर्चना कराई गई थी।

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