
Danger: मौसम बदला तो इस तरह के मामले बढ़े, ज्यादातर बच्चे व किशोर पीडि़त
खासकर मेडिसिन व पीडियाट्रिक विभाग में मरीजों का इलाज किया गया। इनमें 5 से 20 साल की उम्र के बच्चे व किशोर शामिल हैं। नरम-गरम मौसम में गले में इंफेक्शन व खांसी के केस भी आ रहे हैं। आंबेडकर अस्पताल में भर्ती व ओपीडी में आने वाले ज्यादातर बच्चे तेज बुखार, उल्टी-दस्त व निमोनिया से पीडि़त हैं।
डॉक्टरों के अनुसार, गर्म मौसम में साल्मोनेला, ई. कोलाई व लिस्टेरिया जैसे बैक्टीरिया ज्यादा तेजी से पनपते हैं। इससे खाना जल्दी खराब होता है। इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी में स्ट्रीट फूड भी फूड पॉइज़निंग का बड़ा कारण है। दरअसल, ये खाद्य सामग्री खुले में होते हैं। इसमें मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं। धूल भी चिपक जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, फूड पॉइज़निंग सिर्फ पेट खराब होने की समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर बीमारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल करीब 60 करोड़ लोग यानी दुनिया में हर 10 में से एक व्यक्ति दूषित भोजन खाने से बीमार पड़ते हैं। इनमें से 4.2 लाख की मौत हो जाती है। हर साल 5 साल से कम उम्र के सवा लाख बच्चों की मौत फूड पॉइज़निंग के कारण हो जाती है।
डॉक्टरों का कहना है कि सडक़ किनारे बिकने वाले गोलगप्पे, बर्फ के गोले, चाट व कटे फल फूड पॉइज़निंग का मुख्य कारण बन रहे हैं। कई दुकानदार बिना ढंके खाद्य सामग्री बेच रहे हैं। इससे धूल व बैक्टीरिया सीधा खाने में पहुंचते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, 5 से 20 साल के बच्चों व किशोरों में सबसे ज्यादा केस सामने आ रहे हैं। गर्मी में शरीर का मेटाबॉलिज्म बदलता है। खानपान में सावधानी नहीं बरती जाए तो पाचन तंत्र प्रभावित होता है। इस मौसम में सही तरह से भोजन पकाना व स्टोर करना जरूरी है। साफ पानी का इस्तेमाल करना खासकर 20 मिनट तक पानी को उबालकर पीने से कीटाणु मर जाते हैं।
Published on:
17 Apr 2025 06:19 pm

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