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Danger: मौसम बदला तो इस तरह के मामले बढ़े, ज्यादातर बच्चे व किशोर पीडि़त

बदलते मौसम ( changing weather) में राजधानी रायपुर ( the capital Raipur. ) में फूड पॉइजनिंग (food poisoning)और उल्टी-दस्त (vomiting-diarrhea ) के मामले काफी बढ़ गए हैं। पेट में इंफेक्शन व पेट दर्द के केस भी आ रहे हैं। दो दिन बाद आंबेडकर व जिला अस्पताल में ओपीडी खुली तो पता चला कि ऐसे मरीजों की संख्या 15 से 20 फीसदी रही।

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Danger: मौसम बदला तो इस तरह के मामले बढ़े, ज्यादातर बच्चे व किशोर पीडि़त

Danger: मौसम बदला तो इस तरह के मामले बढ़े, ज्यादातर बच्चे व किशोर पीडि़त

नरम-गरम मौसम में इस तरह के केस भी

खासकर मेडिसिन व पीडियाट्रिक विभाग में मरीजों का इलाज किया गया। इनमें 5 से 20 साल की उम्र के बच्चे व किशोर शामिल हैं। नरम-गरम मौसम में गले में इंफेक्शन व खांसी के केस भी आ रहे हैं। आंबेडकर अस्पताल में भर्ती व ओपीडी में आने वाले ज्यादातर बच्चे तेज बुखार, उल्टी-दस्त व निमोनिया से पीडि़त हैं।

लिस्टेरिया जैसे बैक्टीरिया ज्यादा तेजी से पनपते

डॉक्टरों के अनुसार, गर्म मौसम में साल्मोनेला, ई. कोलाई व लिस्टेरिया जैसे बैक्टीरिया ज्यादा तेजी से पनपते हैं। इससे खाना जल्दी खराब होता है। इससे इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। गर्मी में स्ट्रीट फूड भी फूड पॉइज़निंग का बड़ा कारण है। दरअसल, ये खाद्य सामग्री खुले में होते हैं। इसमें मक्खियां भिनभिनाती रहती हैं। धूल भी चिपक जाती है। डॉक्टरों के अनुसार, फूड पॉइज़निंग सिर्फ पेट खराब होने की समस्या नहीं, बल्कि एक गंभीर बीमारी है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर साल करीब 60 करोड़ लोग यानी दुनिया में हर 10 में से एक व्यक्ति दूषित भोजन खाने से बीमार पड़ते हैं। इनमें से 4.2 लाख की मौत हो जाती है। हर साल 5 साल से कम उम्र के सवा लाख बच्चों की मौत फूड पॉइज़निंग के कारण हो जाती है।

गोलगप्पे व बर्फ का गोला पड़ रहा भारी

डॉक्टरों का कहना है कि सडक़ किनारे बिकने वाले गोलगप्पे, बर्फ के गोले, चाट व कटे फल फूड पॉइज़निंग का मुख्य कारण बन रहे हैं। कई दुकानदार बिना ढंके खाद्य सामग्री बेच रहे हैं। इससे धूल व बैक्टीरिया सीधा खाने में पहुंचते हैं। डॉक्टरों के मुताबिक, 5 से 20 साल के बच्चों व किशोरों में सबसे ज्यादा केस सामने आ रहे हैं। गर्मी में शरीर का मेटाबॉलिज्म बदलता है। खानपान में सावधानी नहीं बरती जाए तो पाचन तंत्र प्रभावित होता है। इस मौसम में सही तरह से भोजन पकाना व स्टोर करना जरूरी है। साफ पानी का इस्तेमाल करना खासकर 20 मिनट तक पानी को उबालकर पीने से कीटाणु मर जाते हैं।

ये लक्षण दिखे तो डॉक्टर को दिखाएं

  • 24 घंटे से अधिक उल्टी होना।
  • तीन दिनों से ज्यादा दस्त रहना।
  • उल्टी या मल में खून आना
  • 102 फारेनहाइट या इससे अधिक बुखार रहना
  • चक्कर आना, बहुत कम पेशाब आना, कमजोरी।
  • भ्रम या बेहोशी जैसा महसूस होना।
  • ऐसे बच सकते हैं
  • घर का ताजा व गर्म खाना खाएं।
  • बाहर के सलाद, बर्फ या कटे फल न खाएं।
  • पानी उबालकर या आरओ का ही पीएं।
  • बच्चों को पैक्ड जूस व आइसक्रीम से दूर रखें।
  • स्ट्रीट फूड खाने से करें परहेज
  • इन दिनों स्ट्रीट फूड खाने से बच्चों व बड़ों का स्वास्थ्य खराब हो रहा है। बाहर खाना भी फूड पॉइज़निंग का कारण बन रहा है। बेहतर है घर में बने ताजा व गर्म खाना खाएं। इससे स्वास्थ्य बेहतर रहेगा।
  • डॉ. योगेंद्र मल्होत्रा, प्रोफेसर मेडिसिन, आंबेडकर अस्पतालफ्रिज से निकालकर कोई भी चीज तुरंत न खाएंबदले हुए मौसम में गले में इंफेक्शन के काफी केस आ रहे हैं। अस्थमा के मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होने लगी है। फ्रिज से निकालकर कोई भी चीज तुरंत न खाएं। इसे सामान्य होने दें। इससे बीमार नहीं पड़ेंगे।
  • डॉ. आरके पंडा, एचओडी रेस्पिरेटरी मेडिसिन, आंबेडकर अस्पताल
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