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Chhattisgarh News: 35 साल तक चना-मुर्रा बेचकर जितना कमाया, एक हिस्सा भगवान के लिए रखा, अब उन्हीं पैसों से करवा रही भागवत कथा

Chhattisgarh News: यहां धमतरी से आए पं सुरेंद्र महाराज कथा कह रहे हैं। उन्हें सुनने रोज बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ रही है। कथा 17 मई तक चलेगी।

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Chhattisgarh News: भगवान के लिए कोई कितना समर्पित हो सकता है! ये समझना हो तो पोड़ गांव आ जाइए। जिला मुख्यालय गरियाबंद से महज कुछ मिनटों की दूरी पर। यहां 75 साल की बुजुर्ग महिला रहती हैं। नाम है मान बाई कुंवर। नाम के अनुसार इन्होंने अपने धर्म का भी मान बढ़ाने वाला काम किया है। बुजुर्ग पिछले 35 सालों से चना-मुर्रा, पापड़ और भजिया बेच रहीं हैं। तभी से उन्होंने भगवान के नाम पर अलग से पैसे इकट्ठा करना शुरू कर दिया था। जब इतने पैसे इकट्ठे हो गए कि वे अपनी इच्छा पूरी कर सकें तो उन्होंने तत्काल भागवत कथा का आयोजन कर डाला।

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इसके लिए भी उन्होंने उसी स्थान को चुना जहां 35 साल तक मेहनत कर उन्होंने कथा के लिए पाई-पाई जोड़ी। बाजार में कथा करवाने के पीछे का कारण बताते हुए उन्होंने कहा, बड़े-बुजुर्ग कहा करते थे कि भागवत की महिमा अपरंपार है। इसे श्रद्धा-भक्ति भाव के साथ सुनने मात्र से मोत्रा की प्राप्ति हो जाती है। मैं चाहती थी कि जिनके साथ मैंने इतने सालों तक काम किया, उन्हें इस पुण्य का भागीदार बनने का अवसर मिलना चाहिए। बस इसी सोच के साथ बाजार में कथा का आयोजन करवाया है। यहां धमतरी से आए पं सुरेंद्र महाराज कथा कह रहे हैं। उन्हें सुनने रोज बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ रही है। कथा 17 मई तक चलेगी।

CG Religous: सबसे पहले नातिन की शादी फिर सांसारिक जिम्मेदारी

मानबाई कुंवर 35 साल से सिर्फ भगवान के लिए नहीं, बल्कि अपनी नातिन के लिए भी पैसे इकट्ठा कर रहीं थीं। चंद वर्षों पहले नातिन की शादी करवाकर वे अपनी इस जिम्मेदारी से मुक्त हो गईं। उसके बाद उन्होंने अपने एकमात्र उद्देश्य कथा के लिए पैसे इकट्ठा करना शुरू कर दिया। जब उन्होंने ये ठान दलिया कि मई महीने में भागवत कथा करवानी ही है, फिर उन्होंने लोगों को इस इवेंट से जोड़ना शुरू किया। जितने परिचित थे, सबको आयोजन की जानकारी दी। कार्यक्रम का न्यौता भी दिया। पारिवारिक और सांसारिक जिम्मेदारियों को बखूबी निभाने की वजह से आज गांव के लोग उनकी तारीफ करते नहीं थक रहे हैं।

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Chhattisgarh News: दादी ने जो किया है, उसका फल कई पुश्तों को मिलेगा

पत्रिकासे बातचीत में मान बाई के नाती भेमन तारक ने कहा कि दादी ने जीवनभर पाई-पाई जोड़ी, तब जाकर ये कथा करवा रहीं हैं। भगवान के प्रति उनकी अनोखी भक्ति को देखकर अच्छा लगता है। निश्चित ही वो जो पुण्य कमा कर जा रहीं हैं, उसका पुण्य हमारी आने वाली कई पुश्तों को मिलेगा। इतनी भीषण गर्मी में भी जो कथा सुनने आ रहे हैं, उनकी भक्ति भी काबिल-ए-तारीफ है। उन्होंने बताया कि कथा के आखिरी दिन 17 कई को महारास, कंस उद्धार, रुक्मणि विवाह, सुदामा चरित्र और परीक्षित मोक्ष की कथा सुनाई जाएगी। कथा स्थल पर तुलसी वर्षा होगी। आखिर में विष्णु यज्ञ की पूर्णाहुति के साथ कथा का भी समापन हो जाएगा।