इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दुष्कर्म के मामले में पीड़िता को जिम्मेदार बताते हुए आरोपी की जमानत मंजूर कर ली। अदालत ने कहा कि दोनों पक्ष बालिग हैं और पीड़िता एक शिक्षित युवती है। ऐसे में उसे अपने फैसलों के कानूनी व नैतिक परिणाम समझने चाहिए थे। यदि पीड़िता के आरोप को सही मान भी लें, तो यह कहा जा सकता है कि उसने स्वयं मुसीबत को न्योता दिया है और घटना के लिए खुद जिम्मेदार है।
जस्टिस संजय कुमार सिंह की एकल पीठ ने निश्चल चांडक की जमानत अर्जी पर सुनवाई करते हुए कहा कि पीड़िता ने स्वयं एफआईआर में स्वीकार किया है कि वह स्वेच्छा से तीन महिला मित्रों संग दिल्ली के एक बार में गई थी। इसके बाद उन्होंने शराब पी। सुबह तीन बजे के करीब आरोपी ने उसे अपने घर चलने के लिए कहा। नशे की हालत में सहारे की आवश्यकता होने पर वह साथ जाने को तैयार हो गई। आरोप है कि इस बीच याची उसे एक फ्लैट में ले गया, जहां उसने दुष्कर्म किया।
पीड़िता की शिकायत पर गौतमबुद्ध नगर के थाना सेक्टर 126 में आरोपी के खिलाफ दुष्कर्म की धाराओं में मुकदमा दर्ज कराया गया। आरोपी 11 दिसंबर, 2024 से जेल में है। उसने जमानत के लिए हाईकोर्ट में अर्जी दाखिल
की थी। याची के अधिवक्ता ने दलील दी कि यदि सारे आरोप सत्य भी मान लिए जाएं, तो यह मामला दुष्कर्म का नहीं, बल्कि दोनों के बीच सहमति से बने संबंध का है। वहीं, सरकारी अधिवक्ता की ओर से जमानत का विरोध किया गया।
आवेदक के वकील की ओर से यह प्रस्तुत किया गया है कि आवेदक के न्यायिक प्रक्रिया से भागने या अभियोजन पक्ष के साक्ष्य के साथ छेड़छाड़ करने की कोई संभावना नहीं है। आवेदक कुछ महीनों से जेल में बंद है और उसका कोई आपराधिक इतिहास भी नहीं है। यदि उसे जमानत पर रिहा किया जाता है, तो वह जमानत की स्वतंत्रता का दुरुपयोग नहीं करेगा और मामले के शीघ्र निपटान में सहयोग करेगा। इस लिए अदालत उसकी जमानत याचिका को मंजूर करती है।