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कर्नाटक में घमासानः कांग्रेस-जेडीएस और भाजपा दोनों के लिए आसान नहीं लड़ाई, आज लौटेंगे तीन विधायक

कर्नाटक में घमासानः कांग्रेस-जेडीएस और भाजपा दोनों के लिए आसान नहीं लड़ाई

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कर्नाटक में घमासानः कांग्रेस-जेडीएस और भाजपा दोनों के लिए आसान नहीं लड़ाई

नई दिल्ली। देश के दक्षिण में इन दिनों राजनीति खासी गर्माई हुई है। वजह है सत्ता की चाबी। दरअसल सात महीने पहले बनी कांग्रेस-जेडीएस सरकार अब तक संकट से उबर नहीं पाई है। भाजपा लगातार यहां अपनी सरकार बनाने में कवायद में जुटी हुई है। सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों एक दूसरे पर विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोप भी लगा रहे हैं। पिछले कुछ दिनों से ये विवाद और भी गर्मा गया है। कर्नाटक में कांग्रेस-जनता दल (सेक्यूलर) गठबंधन सरकार से 2 निर्दलीय विधायकों की समर्थन वापसी के बाद सियासी लामबंदी तेज हो गई है। कांग्रेस-जेडीएस और भाजपा दोनों ही सरकार बनाने और बचाने के लिए जी तोड़ कोशिश में जुटे हैं ऐसे में दोनों के लिए चुनौतियां कम नहीं हैं।


चुनाव में 104 सीटें जीतने के बाद भी पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा सरकार न बना पाने की गम अब भुला नहीं पाएं हैं। यही वजह है कि वो लगातार कोशिशों में जुटे हैं और इस बार उनकी कोशिश रंग भी ला सकती है। इस बार उनकी कोशिश पहले की अपेक्षा मजबूत दिख रही है। येदियुरप्पा दावा कर रहे हैं कि जल्द ही खुशखबरी मिलेगी। वहीं, कुमारस्वामी गठबंधन सरकार पर किसी संकट से इनकार कर रहे हैं।

आज लौटेंगे कांग्रेस के तीन विधायक
कांग्रेस के 3 विधायक पहले ही मुंबई में कैंप कर चुके हैं और माना जा रहा है कि वे भाजपा के संपर्क में हैं। दरअसल लगातार खबरें आ रही हैं कि कांग्रेस-जेडीएस विधायक भाजपा के संपर्क में हैं। लेकिन कांग्रेस के मंत्री जमीर अहमद इस खबर को गलत बता रहे हैं। उनका कहना है कि सभी विधायक घूमने गए हैं औऱ बुधवार को प्रदेश लौट आएंगे।

दिल्ली में येदियुरप्पा का डेरा
पूर्व मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा भी दिल्ली में डेरा डाले हुए हैं। हालांकि आलाकमान की ओर से अभी उन्हें मिलने का समय नहीं मिला है।भाजपा में कुछ नेताओं का मानना है कि पार्टी को आगामी लोकसभा चुनाव पर अपना ध्यान केंद्रित करना है इस वजह से वक्त ज्यादा लग रहा है। चुनाव से पहले खरीद फरोख्त की बात जनता तक पहुंची तो इसका परिणाम नकारात्मक हो सकता है।

12 विधायक कर दें वॉक आउट
भाजपा को सरकार बनानी है तो वो संख्या बल बढ़ाने के अलावा एक और विकल्प पर काम कर सकती है। दरअसल विश्वासमत के दौरान भाजपा की कोशिश होगी कि कांग्रेस या जेडीएस या फिर दोनों के कुल 12 विधायक वॉक आउट कर लें ऐसे में गठबंधन अपना बहुमत साबित नहीं कर पाएगा और सरकार गिर जाएगी। हालांकि ये इतना आसान नहीं है। आपको बता दें कि बहुमत का जादुई आंकड़ा 113 है। इस वक्त गठबंधन के पास स्पीकर समेत 119 विधायक हैं। जबकि भाजपा के पास 104 प्लस 2 निर्दलीय।

गठबंधन में नाराजगी का फायदा
भाजपा को एक और फायदा इस बात का मिल सकता है कि इस वक्त कांग्रेस-जेडीएस गठबंधन में कुछ नाराजगी चल रही है। ये पदों और टिकटों को लेकर बनी हुई है। भाजपा इस नाराजगी की फायदा उठाने के मूड में है ताकि अपने मिशन में कामयाब हो सके। पिछले कुछ दिनों से चल रही कवायद उसकी मेहनत का ही नतीजा है।

जेडीएस भी पीछे नहीं
भाजपा भले ही सत्ता आने का सपना संजो रही है लेकिन सत्ता पक्ष जेडीएस अपनी कुर्सी बचाने के लिए हर संभव कोशिश में जुटी है। जेडीएस ने भी दावा किया है कि भाजपा के ही 8 विधायक उनके संपर्क में हैं। इसका खुलासा खुद पूर्व सीएम येदियुरप्पा ने भी किया। उन्होंने कहा कि कुमारस्वामी भाजपा के विधायकों को तोड़ने में जुटे हैं। कुल मिलाकर कोशिशें दोनों दलों की ओर से चल रही हैं और चुनौतियां भी दोनों दलों के सामने है। ऐेसे में ये घमासान आगे नए रंग दिखा सकता है।

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