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गोरखपुर के बाद अब आजमगढ़ में भी भ्रष्टाचार में फंसे स्वास्थ्य मंत्री के खास सीएमओ

नियुक्तियों में फर्जीवाड़े की पीडी और डीएमओ करेंगे जांच।

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Azamgarh Hospital

आजमगढ़ हॉस्पिटल

आजमगढ़. यूपी के स्वास्थ्य मंत्री के खास मुख्य चिकित्साधिकारी डा. रविंद्र कुमार गोरखपुर के बाद अब आजमगढ़ में भी भ्रष्टाचार के आरोप से घिर गए है। स्वास्थ्य विभाग में जिला स्वास्थ्य समिति से बीपीएम और डाटा इंट्री आपरेटर के पद पर पैसे लेकर नियुक्ति करने का आरोप सीएमओ पर लगाया गया है। इस ममाले में मुख्य विकास अधिकारी डीएस उपाध्याय को जांच अधिकारी नामित किया गया है। सीडीओ ने जांच के लिए परियोजना निदेशक डीआरडीए की अध्यक्षता में दो सदस्यीय कमेटी बनाई है। अब कमेटी आरोपों की जांच करेगी। उधर दूसरी तरफ अधीक्षक/प्रभारी चिकित्साधिकारी भी उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए पद से त्यागपत्र दे दिये हैं। इससे उनकी मुसीबत और बढ़ती दिख रही है।

बता दें कि स्वास्थ्य विभाग में एक एजेंसी के माध्यम से डाटा एंट्री आपरेटर, ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर के 21-21 पदों पर तैनाती हुई थी। वर्तमान में डाटा एंट्री आपरेटर के पद पर 17 और ब्लाक प्रोग्राम मैनेजर के पद पर 18 कर्मचारी तैनात हैं। 27 सितबंर को एजेंसी की सेवा समाप्त होने से उक्त कर्मचारियों का मानदेय बाधित है। पिछले दिनों सभी आपरेटर और बीपीएम जिला स्वच्छता समिति से नियुक्ति के लिए जिलाधिकारी से मिले थे। डीएम के निर्देश पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई थी। वहीं, एनएचएम के मिशन निदेशक ने आदेश दिए थे कि डाटा एंट्री आपरेटरों के पदों को बनाया रखा जाए और नई भर्ती नहीं की जाए। इस बीच जिलाधिकारी से शिकायत की गई थी कि सीएमओ ने पल्हनी और अजमतगढ़ ब्लाक में डाटा एंट्री आपरेटरों के खाली और महाराजगंज था अहरौला के पुराने आपरेटरों के हटाकर पैसे लेकर डूडा से नियुक्ति करने की शिकायत की गई।

अरुण कुमार सिंह की ओर से की गई शिकायत में जिला स्वच्छता समिति के नाम पर धन उगाही का आरोप लगाया गया था। डीएम ने इसकी जांच सीडीओ डीएस उपाध्याय को सौंपी है। वहीं मुख्य विकास अधिकारी ने प्रकरण की जांच के लिए दो सदस्यी कमेटी का गठन किया है। इसमें परियोजना निदेशक डीआरडीओ को अध्यक्ष और जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को सदस्य बनाया है। दोनों अधिकारियों से जल्द से जल्द रिपोर्ट तलब की है। इसके पूर्व सीएमओ पर गोरखपुर में भी भ्रष्टाचार का आरोप लगा था लेकिन कार्रवाई के बजाय उन्हें आजमगढ़ का सीएमओ बनाकर भेज दिया गया था।

वहीं दूसरी तरफ जिले के भी 22 ब्लाकों पर तैनात अधीक्षक/प्रभारी चिकित्साधिकारी भी सीएमओ की कार्यशैली से नाराज हैं। उन्होंने सीएमओ पर उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए बुधवार को ही पद से त्यागपत्र दे दिया है। इससे सीएमओ की मुसीबत और बढ़ गयी है। चुंकि सीएमओ पर सत्ता मेहरबान है इसलिए अभी तक उनपर किसी विरोध का असर नहीं है।

By Ran Vijay Singh