
पढ़िए मातृत्व पर कविता
मां और मातृत्व के ऊपर सीमा भाटी द्वारा रचित ये कविता बहुत सुंदर तरीके से इस रिश्ते के भावनात्मक पहलू को परिभाषित करती है। किसी ने सच ही कहा है जहां न पहुंचे रवि वहां पहुंचे कवि... कवि अपने शब्दों से उन भावनाओं को छू लेता है जिन्हें समझ पाना तो कठिन होता ही है अपितु उन्हें लिख पाना और समझा पाना और भी ज्यादा कठिन होता है। पढ़िए सीमा भाटी रचित कविता और महसूस कीजिए इन भावनाओं को...
बुनियाद हूं हर शय की
लिए बैठी हूं वक्त से मिले
जख्म तन्हाई
गमों का सैलाब
बे इन्तिहा सब्र
अश्कों का खारा समन्दर
खुद के अन्दर मगर
इन सब से दूर रखना है नई नस्ल को
सींचना है अपने हौसले से इन्हें/संवारनी है जिंदगी
एहितयात और तजर्बे से
कहीं वक्त के बे रहम तकाजे मेरी नई नस्ल को तबाह न कर दे
उड़ा न ले आब इनके चेहरों की/अगर ऐसा हुआ
तो हिल जाएगी बुनियाद भी मगर मैं ऐसा हरगिज
न होने दूंगी क्यूंकि
अब मैं हूं बुनियाद
नई नस्ल के वजूद की
हां मैं हूं बुनियाद।
Published on:
30 Mar 2023 06:00 pm
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