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प्लास्टिक कचरा पृथ्वी के लिए बना बड़ा खतरा, विकल्प जरूरी

डॉ. रिपुन्जय सिंह, सदस्य, राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड, जयपुर

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जयपुर

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Neeru Yadav

Apr 01, 2025

प्लास्टिक एक अद्वितीय और बहुपयोगी आविष्कार है, जो आज के आधुनिक जीवन का अभिन्न हिस्सा बन चुका है। यह हमारी दैनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बेहद उपयोगी साबित हुआ है, लेकिन इसके अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग ने पर्यावरणीय संकट को जन्म दिया है। सिंगल यूज प्लास्टिक यानी एक बार काम में आने वाला प्लास्टिक पर्यावरण को सबसे अधिक नुकसान पहुंचाता है। यह न केवल मिट्टी, जल और वायु को प्रदूषित करता है, बल्कि जलीय जीवन, वन्यजीव और मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बन गया है। इसके बावजूद, प्लास्टिक का सही ढंग से निपटान और पुनर्चक्रण अब तक प्रभावी रूप से लागू नहीं किया जा सका है। टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल जीवनशैली अपनाने से ही इस संकट का समाधान संभव है। केंद्र सरकार ने 2016 में प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियम लागू किया था, जिसका उद्देश्य कचरे के प्रबंधन को व्यवस्थित करना था। इसकी मुख्य विशेषताओं में प्लास्टिक कचरे को संग्रहित, पृथक और पुनर्चक्रण करने का प्रावधान था। साथ ही एक बार काम में आने वाले प्लास्टिक के उपयोग को हतोत्साहित करना, नगर निकायों को कचरे के पृथक्करण और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार बनाना व विस्तारित निर्माता जिम्मेदारी लागू करना था। इसके तहत प्रावधान किया गया कि निर्माता और ब्रांड्स अपने उत्पादों से उत्पन्न कचरे का प्रबंधन करेंगे।
सरकार ने 2022 में सिंगल यूज प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगाने और ‘प्लास्टिक वेस्ट मैनेजमेंट नियम’ लागू करने जैसे कदम उठाए हैं। इस नियम में संशोधन के तहत ऐसे प्लास्टिक के उत्पादन, बिक्री और उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया है। 19 प्लास्टिक उत्पादों जैसे प्लास्टिक स्ट्रॉ, झंडे, प्लेट, कप, ग्लास, कटलरी, 100 माइक्रोन के पीवीसी बैनर आदि पर पूर्ण प्रतिबंध लगाना, उत्पादक कंपनियों को पुनर्चक्रण लक्ष्यों को पूरा करना अनिवार्य किया व बायोडिग्रेडेबल प्लास्टिक और पुन: उपयोग योग्य सामग्रियों को बढ़ावा दिया है। इसके अलावा, समुदाय आधारित पहल, पुनर्चक्रण को बढ़ावा और वैकल्पिक सामग्रियों का उपयोग जैसे कदम प्लास्टिक प्रदूषण को नियंत्रित करने में सहायक हो सकते हैं। इसका उद्देश्य, पर्यावरणीय प्रदूषण को कम करना था व इस नियम का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाना था। इसके साथ ही अन्य पहलों में स्वच्छ भारत अभियान के तहत प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने और सफाई को बढ़ावा देना था।
विश्व स्तर पर भी प्लास्टिक कचरा प्रबंधन नियमों के तहत यूरोपीय संघ, संयुक्त राज्य अमरीका, चीन, जापान, केन्या, ऑस्ट्रेलिया आदि देशों ने एक बार प्रयोग में लिए जाने वाले प्लास्टिक व इससे की गई पैकेजिंग पर प्रतिबंध लगाया है व इससे प्रदूषण कारणों को कम करने के लिए भारी जुर्माना, सख्त दंड व कानून बनाए हैं। इन देशों में प्रदूषण के खिलाफ वैश्विक अभियान चलाया गया है। प्लास्टिक निर्माताओं को पुनर्चक्रण और विकल्पों को प्रोत्साहन देना व इससे निवेश के लिए प्रेरित किया है। इस प्लास्टिक के व्यापक उपयोग पर अंकुश लगाने के मार्ग में कई चुनौतियां भी हैं जिनमें इसका सस्ता और आसान विकल्प उपलब्ध नहीं होना, पुनर्चक्रण की प्रक्रिया महंगी और सीमित होना और लोगों में इस प्रदूषण के खतरों के प्रति जागरूकता का अभाव होना है। यही वजह है कि प्रतिबंध के बावजूद इसका उत्पादन और उपयोग जारी है। यह प्रदूषण एक वैश्विक समस्या है, लेकिन इससे निपटना असंभव नहीं है। यदि सरकार, उद्योग, और आम जनता मिलकर कार्य करें, तो इस समस्या को नियंत्रित किया जा सकता है। हमें अपने दैनिक जीवन में छोटे-छोटे बदलाव लाकर और पर्यावरण-अनुकूल विकल्प अपनाकर धरती को प्लास्टिक-मुक्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाने होंगे। हमें एक बार काम में आने वाले प्लास्टिक के विकल्पों को अपनाना होगा, पुनर्चक्रण को बढ़ावा देना होगा और कचरा प्रबंधन में सुधार करना होगा।