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किडनी प्रत्यारोपण के बाद अब सुअर के लिवर से इंसान के इलाज के ट्रायल को मिली मंजूरी

मेडिकल महान : कलेजा अचानक बंद होने से त्रस्त मरीजों को हो सकता है फायदा

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वाशिंगटन. पशुओं के अंगों को इंसानी शरीर में लगाने के प्रयोगों के बीच अमरीकी नियामक संस्था फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने सुअर के लिवर से इंसान के इलाज के ट्रायल को मंजूरी दे दी है। अब इस पर अध्ययन शुरू किया जाएगा कि जीन-एडिटेड सुअर के कलेजे का इस्तेमाल उन लोगों के इलाज के लिए किया जा सकता है या नहीं, जिनका कलेजा अचानक फेल हो गया हो।जीन-एडिटेड सुअर बनाने वाली अमरीकी कंपनी ईजेनेसिस ने अपनी पार्टनर ब्रिटिश कंपनी ऑर्गनऑक्स के साथ यह ट्रायल जल्द शुरू करने का ऐलान किया है। ट्रायल में जीन-एडिटेड सुअर के कलेजे का ही इस्तेमाल किया जाएगा। ट्रायल के दौरान ऐसे मरीजों के खून को सुअर के कलेजे के जरिए अस्थायी रूप से फिल्टर किया जाएगा, जिनके कलेजे ने अचानक काम करना बंद किया। ट्रायल में शोधकर्ता सुअर के कलेजे को ट्रांसप्लांट नहीं करेंगे, बल्कि बाहर से अटैच करेंगे।

शवों पर किए प्रयोग

ईजेनेसिस के सीईओ माइक कर्टिस ने बताया कि चार मृत लोगों के शरीरों के साथ किए गए प्रयोगों में पाया गया कि सुअर के कलेजे की बदौलत इंसानी कलेजा दो-तीन दिन तक कुछ तरह के काम कर सकता है। अमरीका में हर साल करीब 35,000 लोगों का कलेजा अचानक काम करना बंद कर देता है। इलाज के विकल्प कम हैं। ऐसे मामलों में मृत्यु दर 50 फीसदी तक है।

किन पर होगा ट्रायल

ट्रायल के लिए इंटेंसिव केयर में भर्ती 20 ऐसे मरीजों को शामिल किया जाएगा, जिन्हें ट्रांसप्लांट के योग्य नहीं पाया गया। एक उपकरण के जरिए इन मरीजों के खून को सुअर के कलेजे के रास्ते पंप किया जाएगा। यह जीन-एडिटेड सुअरों के अंगों से इंसानी जिंदगियां बचाने की नई कोशिश होगी।