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मणिपुर हिंसा पर सर्वदलीय बैठक खत्म, विपक्ष ने प्रतिनिधिमंडल भेजने की रखी मांग

Manipur Violence: पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में एक महीने से भी ज्यादा समय से हिंसा जारी है। राज्य सरकार, स्थानीय प्रशासन और केंद्रीय बलों की तैनाती के बाद यहां हालात अभी तक आउट ऑफ कंट्रोल है। राज्य में शांति की स्थापना के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अगुआई में सर्वदलीय बैठक हुई।

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मणिपुर हिंसा पर दिल्ली में सर्वदलीय बैठक शुरू

मणिपुर हिंसा पर दिल्ली में सर्वदलीय बैठक शुरू

manipur violence मणिपुर हिंसा पर राजधानी दिल्ली में सर्वदलीय बैठक समाप्त हो गई है। यह बैठक संसद के पुस्तकालय सभागार में हुई। बैठक की अध्यक्षता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की। बैठक में कई दलों के प्रतिनिधि शामिल हुए और मणिपुर में कानून-व्यवस्था की वापसी के लिए मंथन की। बैठक में बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा, केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी, केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, टीएमसी सांसद डेरेक ओ ब्रॉयन, CPI(M) के सांसद जॉन ब्रिटास, राजद के राज्यसभा सांसद मनोज झा, लोजपा नेता पशुपति पारस, मेघालय के सीएम कोर्नाड संगमा सहित कई अन्य नेता शामिल हैं। बैठक में इस बात चर्चा हुई कि मणिपुर में जारी हिंसा को कैसे समाप्त किया जाए। इस बैठक से एनसीपी नेता शरद पवार, टीएमसी नेता ममता बनर्जी ने दूरी बनाई थी। कांग्रेस की ओर से इस मीटिंग में मणिपुर के पूर्व सीएम ओकराम इबोबी सिंह शामिल हुए।


डीएमके सांसद ने उठाई सर्वदलीय टीम भेजने की मांग

बैठक के बारे में डीएमके सांसद तिरुचि शिवा ने बताया कि हमने मणिपुर को लेकर अपनी चिंताएं रखी हैं। 100 लोग मारे गए हैं और करीब 60,000 लोग विस्थापित हुए हैं। इस पर सबसे दुखद यह है कि प्रधानमंत्री ने इस पर एक शब्द तक नहीं कहा। वहां की स्थिति का अच्छे से पता लगाने के लिए एक सर्वदलीय दल को मणिपुर भेजना चाहिए। गृह मंत्री ने हमें आश्वासन दिया है।

मणिपुर की राजनीतिक नेतृत्व पर लोगों का विश्वास नहींः राजद

बैठक में शामिल राजद सांसद मनोज झा ने कहा कि खुले मन से बात हुई हम सबने अपनी राय रखी। वहां की राजनीतिक नेतृत्व में (लोगों का) अविश्वास है और यह बात सारे विपक्षी दलों ने रखी। हमने कहा कि जो इंसान प्रशासन चला रहा है उसमें कोई विश्वास नहीं है। अगर आपको शांति बहाल करनी है तो आप ऐसे व्यक्ति के रहते नहीं कर सकते।

इस बीच यह जानकारी भी सामने आई कि मणिपुर में विस्फोट का मामला राष्ट्रीय जांच एजेंसी को सौंपा गया।

कांग्रेस ने कहा- पीएम मोदी की करनी चाहिए थी अगुआई

शनिवार को कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी बैठक पर सवाल उठाते हुए कहा कि मणिपुर 52 दिनों से जल रहा है और गृहमंत्री ने अब जाकर सर्वदलीय बैठक बुलाई है। इस बैठक की अगुआई असल में पीएम मोदी को करनी चाहिए थी, लेकिन उन्होंने अब तक चुप्पी साध रखी है। मालूम हो कि मणिपुर में कुकी और मैतेई समुदाय के बीच लंबे समय से जातीय हिंसा छिड़ी है।


ओवैसी ने कहा- भेदभाव का मिसाल बन चुका है मणिपुर

AIMIM के नेता असदुद्दीन ओवैसी इस बैठक की आचोलना करते हुए कहा कि 'देश के पीएम कहते हैं कि मुल्क में भेदभाव नहीं होता है। मणिपुर में 300 चर्च को जला दिया गया। वहां के DGP को हटा दिया गया और आप कहते हैं कि भेदभाव नहीं है। मणिपुर भेदभाव की बेहतरीन मिसाल बन चुका है। अगर यह भेदभाव नहीं है तो क्या है।'

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