
पंजाब के आनंदपुर साहिब से करीब इक्कीस किलोमीटर की दूरी तय कर बस से हिमाचल प्रदेश के नैनादेवी मंदिर परिसर तक पहुंचा। यहां देश के कोने-कोने से श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। मंदिर की सीढिय़ां चढ़ते वक्त यहां वर्ष २००८ में हुआ भीषण हादसा याद आ गया जब भूस्खलन की अफवाह के बाद मची भगदड़ में 145 लोगों की मौत हो गई थी। हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर जिले में स्थित नैनादेवी यह हमीरपुर लोकसभा क्षेत्र में आता है। मैने इसी जिले से राज्य के ताजा राजनीतिक माहौल को समझने की कोशिश की। यहां 1993 से 2022 के बीच हर पांच साल में सत्ता में बदलाव का रिवाज रहा है।
सत्ता की बागडोर एक बार कांग्रेस तो एक बार भाजपा के हाथ में रही है। ऐसे में यहां मतदाताओं के मन को भांपना आसान नहीं। रोप-वे के पास खड़े हमीरपुर से आए हरिप्रकाश से आने वाले लोकसभा चुनावों को लेकर चर्चा छेड़ी तो पलटकर बोले- चुनाव में ऊंट किस करवट बैठता है, यह पहले पता नहीं चलता है, हिमाचल में तो इसका अंदाजा भी लगाना मुश्किल है। देखिए, लोकसभा चुनाव 2019 में परचम लहराने वाली भाजपा से 2022 में हुए विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने सत्ता छीन ली। अभी तो, भाजपा के सामने लोकसभा चुनाव में वर्चस्व बनाए रखने की चुनौती है, तो कांग्रेस की राह में भी मुश्किलें कम नहीं है।
विधानसभा चुनावों में भाजपा की जयराम ठाकुर सरकार बहुत कम मत प्रतिशत का अंतर रखते हुए रिपीट होने से वंचित हो गई थी। यहां भाजपा को 43 प्रतिशत और कांग्रेस को 43.90 प्रतिशत वोट मिले थे। विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को मिली बढ़त का सिलसिला जारी रखने के लिए यहां सुखविंदर सिंह सुक्खू की सरकार पूरी ताकत लगा रही है। इस ताकत का असर कितना हो गया यह कहा नहीं जा सकता लेकिन मंडी निवासी रूपेश की इस बात में दम लगा कि हिमाचल में भी अभी अयोध्या की हवा आ रही है, लेकिन हर क्षेत्र में माहौल अलग-अलग दिख रहा है।
नैनादेवी के बस स्टैंड पर मिले महेन्द्र सिंह का कहना था कि भाजपा के पास पीएम मोदी के रूप में बड़ा चेहरा है। वहीं विपक्ष के 'इंडिया' गठबंधन का चेहरा कैसा होगा यह भी अभी तक स्पष्ट नहीं है। लोकसभा चुनाव से पहले ही हिमाचल प्रदेश में सियासी उठा-पटक शुरू होने लगी है। कई नेता पाला बदल रहे हैं। भले ही यह छोटे स्तर पर हो लेकिन सियासत में हर चाल महत्व रखती है। स्थानीय मुद्दों के बारे में पूछा तो रोशनलाल गुर्जर बोले, गांवों की सड़कें पक्की होनी चाहिए। सत्ता में आने वाले दलों को जो चुनावी वादे पूरे करने चाहिए। अयोध्या में राम मंदिर को लेकर रोशन का कहना था कि कोई माने या नहीं माने पर राम मंदिर भी अपने आप में एक मुद्दा बना ही दिया है।
हिमाचल प्रदेश की चार लोकसभा सीटों पर पिछले चुनाव 2019 में 14 राजनीतिक दलों ने अपने प्रत्याशी मैदान में उतारे थे, लेकिन सभी सीटों पर भाजपा को जीत मिली। कांगड़ा से किशन कपूर, शिमला से सुरेश कुमार कश्यप, हमीरपुर से अनुराग सिंह ठाकुर भाजपा से सांसद हैं। आम चुनाव में मंडी सीट से भी भाजपा जीती थी, लेकिन 2021 में हुए उप चुनाव में कांग्रेस की प्रतिभा सिंह सांसद चुनी गई। ऐसे में वर्तमान में तीन सीट भाजपा और एक सीट कांग्रेस के पास है।
संबल नैनादेवी से वापस लौटते समय बस में नवनीत से बात हुई तो बोले, हिमाचल प्रदेश ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर निर्भर है, इसलिए दुग्ध प्रसंस्करण संयंत्र लगाने को प्रोत्साहन देने की जरूरत है। इसके साथ सेब की बागवानी करने वाले किसानों को शोषण से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है।
हिमाचल प्रदेश में एक बार कांग्रेस तो एक बार भाजपा को राज्य में सरकार बनाने का मौका मिलता रहा है। राजनीतिक रूप से यहां लोग जागरुक हैं। इसीलिए हर चुनाव भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए चुनौतियों भरा होता है। दोनों दलों के अलावा हर चुनाव में कई नए दल भी मैदान में आते हैं, लेकिन उनके प्रत्याशी यहां जमानत भी नहीं बचा पाते। वर्ष 1952 से अब तक हिमाचल प्रदेश में 7 मुख्यमंत्री बने हैं, इनमें कई एक से अधिक बार भी मुख्यमंत्री रहे। इनमें से चार कांग्रेस पार्टी के थे, जिनमें पहले यशवंत सिंह परमार थे। कई चुनावों में मुख्यमंत्री पद कांग्रेस के वीरभद्र सिंह और भाजपा के प्रेम कुमार धूमल के बीच ही घूमता रहा। चार लोकसभा और 68 विधानसभा सीटों वाले इस छोटे राज्य में चुनाव नतीजों को लेकर कोई भविष्यवाणी करना राजनीतिक पंडितों के लिए भी मुश्किल रहता है।
Published on:
16 Feb 2024 02:48 pm
बड़ी खबरें
View Allबिहार चुनाव
राष्ट्रीय
ट्रेंडिंग
