बिहार चुनाव से पहले कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, तेजस्वी यादव और अन्य कांग्रेस-राजद नेताओं ने दिल्ली में मल्लिकार्जुन खड़गे के आवास पर बैठक की।
Bihar election: बिहार में इसी साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले दिल्ली में महागठबंधन की तैयारियों को लेकर हलचल तेज हो गई है। मंगलवार को कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के आवास पर बिहार के नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी और अन्य शीर्ष नेताओं के साथ अहम बैठक हुई। इस बैठक में सीट बंटवारे और चुनावी रणनीति को लेकर चर्चा की गई।
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कहा, हमने बैठक की और सकारात्मक चर्चा हुई। हम 17 अप्रैल को पटना में फिर मिलेंगे। हम पूरी तरह तैयार हैं और हम बिहार को आगे ले जाना चाहते हैं। राज्य में एनडीए सरकार के 20 साल बाद भी बिहार सबसे गरीब राज्य है। हम चर्चा करेंगे और सर्वसम्मति से सीएम का चेहरा तय करेंगे। नीतीश जी तो हाईजैक हो चुके हैं। एनडीए इस बार बिहार में सरकार नहीं बना रहा है।
बैठक में कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल, बिहार प्रभारी कृष्णा अल्लवरु, राजद सांसद मनोज झा और तेजस्वी यादव के राजनीतिक सलाहकार संजय यादव भी मौजूद थे। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में बिहार चुनाव में महागठबंधन के मुख्यमंत्री चेहरे को लेकर भी विचार-विमर्श हुआ।
तेजस्वी यादव और राहुल गांधी की आज हुई मुलाकात पर बिहार बीजेपी अध्यक्ष दिलीप जायसवाल ने कहा, कांग्रेस और आरजेडी का गठबंधन बेमेल गठबंधन है। इनका एजेंडा एक दूसरे का कद कम करना है। आरजेडी कभी नहीं चाहेगी कि कांग्रेस बिहार में फिर से अपना जनाधार बढ़ाए और कांग्रेस बिहार में आरजेडी से बड़ी बनी रहना चाहती है। यह दोनों के बीच लुका-छिपी का खेल है। यह बेमेल गठबंधन है।
243 सीटों वाली बिहार विधानसभा के लिए राजद ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि तेजस्वी यादव महागठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री पद के दावेदार होंगे। हालांकि कांग्रेस अब तक इस मुद्दे पर खुलकर कुछ नहीं कह रही है और उसका रुख है कि सीएम का फैसला चुनाव के बाद लिया जाएगा।
राजद प्रवक्ता मृत्युंजय तिवारी ने बैठक पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बिहार की 14 करोड़ जनता पहले ही तेजस्वी यादव को अपना मुख्यमंत्री मान चुकी है। उन्होंने कहा, महागठबंधन में सबकुछ ठीक है और हम महाविजय की ओर बढ़ रहे हैं। उन्होंने यह भी तंज कसा कि एनडीए में तो मुख्यमंत्री के कई दावेदार हैं, पहले वे अपने गठबंधन को संभालें।
तेजस्वी-राहुल की यह बैठक न सिर्फ सीटों के बंटवारे को अंतिम रूप देने के लिहाज से अहम मानी जा रही है, बल्कि इससे महागठबंधन की एकजुटता का संदेश देने की भी कोशिश की गई है।