नागौर. कोई झाड़ू से घाटों पर कई महीनों से जमा कचरे को हटा रहा था तो किसी ने घाटों पर उगी घास व झाडि़यों की सफाई की। जड़ा तालाब परिसर में उगी बबूल की झाडि़यां काटी गई। तालाब में डाली गई पूजन सामग्री व कचरे को श्रमदान कर बाहर निकाला गया। अवसर था राजस्थान पत्रिका के अमृतमजलम् अभियान के तहत मंगलवार सुबह 7 बजे शहर के ऐतिहासिक जड़ा तालाब में आयोजित श्रमदान का। श्रमदान में काफी लोग पहुंचे। खास बात यह रही कि करीब 10 साल पहले राजस्थान पत्रिका के अभियान के तहत तालाब को संवारने के लिए एक-दो महीने नहीं दो साल तक समय-समय पर श्रमदान करने वाले यहां लोग यहां पहुंचे तो काफी उत्साहित दिखे। शहर का पर्यटन स्थल बन चुका जड़ा तालाब उपेक्षा का शिकार नहीं हो जाए, इसी उद्देश्य को लेकर पत्रिका ने मंगलवार को यहां श्रमदान का कार्यक्रम रखा। शहरवासियों ने करीब दो घंटे तक पसीना बहाकर तालाब को चमका दिया। साथ ही आगामी दिनों में यहां फिर से श्रमदान का निर्णय लिया।
इन्होंने किया श्रमदान
अभियान के तहत श्रमदान में मिर्धा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. शंकरलाल जाखड़, समाजसेवी भोजराज सारस्वत, मिर्धा कॉलेज के एनसीसी प्रभारी डॉ. प्रेमसिंह बुगासरा, रोटरी क्लब के सचिव पवन काला, पूर्व अध्यक्ष पीएम बेनीवाल, सुरेन्द्रसिंह, पूर्व जिला खेल अधिकारी भंवरराम सियाक, पर्यावरण प्रेमी सुखराम चौधरी, कमल सोनी, हाउसिंग बोर्ड विकास समिति के अध्यक्ष रामप्रकाश बिशु, कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष हनुमान बांगड़ा, पूर्व सैनिक देवकरण चांगल, लाइनमैन अर्जुन प्रजापत, एबीवीपी के पीयूष लोमरोड़ सहित मिर्धा कॉलेज के एनसीसी केडेट्स, एनएसएस स्वयंसेवकों ने योगदान दिया। इसके साथ स्वामी कुशालगिरी के निर्देश पर गो चिकित्सालय की टीम ने महत्वपूर्ण योगदान दिया। श्रमदान के बाद प्रो. प्रेमसिंह बुगासरा ने फल वितरित किए।
तालाब के सौंदर्यीकरण पर चर्चा
श्रमदान के बाद तालाब की साफ-सफाई के साथ सौंदर्यीकरण को लेकर शहरवासियों ने चर्चा की। जिसमें प्रबुद्ध नागरिकों ने बताया कि घर की पूजन सामग्री को तालाबों में विसर्जित नहीं करें। इससे तालाब का पानी दूषित होता है। तालाब के आसपास के क्षेत्र की सुरक्षा भी जरूरी है। इसके लिए प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए।