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वीडियो : शहरवासियों ने कहा – नागौर में खुले विश्वविद्याल, शहर की सड़कें सुधरे

राजस्थान पत्रिका के स्पीक आउट कार्यक्रम में शहरवासियों ने रखे विचार

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नागौर. शहर के राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई) में शनिवार को राजस्थान पत्रिका की ओर से स्पीक आउट कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में शहर के प्रबुद्ध नागरिकों एवं आईटीआई के प्रशिक्षार्थियों ने शहर के विकास के साथ प्रमुख मुद्दों एवं समस्याओं पर अपने विचार रखे।

मिर्धा कॉलेज के पूर्व प्राचार्य डॉ. शंकरलाल जाखड़ ने कहा कि राजस्थान पत्रिका हमेशा जनहित से जुड़े मुद्दों को उठाता है और सामाजिक सरोकार के कार्यों में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में नागौर व डीडवाना-कुचामन जिले में सरकारी एवं निजी कॉलेजों की संख्या सवा सौ से अधिक हो चुकी है, इनमें पढ़ने वाले विद्यार्थियों को छोटे-छोटे काम के लिए अजमेर जाना पड़ता है, इसलिए अब नागौर में विश्वविद्यालय खोलने की आवश्यकता है। इसके साथ उन्होंने शहर में हो रहे विकास कार्यों में भ्रष्टाचार को लेकर आवाज उठाने की बात कही।

समाजसेवी भोजराज सारस्वत ने कहा कि शहर के कुछ मुद्दे ऐसे हैं, जिनको लेकर पत्रिका को लगातार खबरें प्रकाशित करने की आवश्यकता है। यदि लगातार खबरें प्रकाशित होंगी तो सुधार अवश्य होगा। उन्होंने कहा कि शहर में मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है, न तो सड़कें सही हैं और न ही बिजली और पानी की सप्लाई सुचारू हो रही है। सारस्वत ने दुर्घटनाओं को रोकने के लिए कृषि मंडी के पश्चिमी गेट के सामने, बीकानेर रोड रीको व जेएलएन अस्पताल के सामने सर्किल बनाने का सुझाव भी दिया।

सड़कों के किनारे साफ हों

उपभोक्ता मामलों के विशेषज्ञ बलवीर खुड़खुडि़या ने कहा कि शहर में जो दो आरओबी बनाए गए हैं, उनमें उन पर यातायात भले ही चालू हो गया है, लेकिन कई कमियां छोड़ दी गई हैं, जो दुर्घटनाओं का सबब बन रही हैं। उन्होंने कहा कि मानासर आरओबी के बीच से नीचे उतरने के लिए सीढि़या बनाई जानी थी, लेकिन ठेकेदार ने नहीं बनाई। रंग भी आधा-अधूरा किया गया है। शहर में मुख्य सड़कों पर फुटपाथ की सुविधा होनी चाहिए, जो नहीं है। साथ ही शहर एवं गांवों की सड़कों के किनारे उगीझाडि़यां हटाई जानी चाहिए।

शहर में बनाएं जल प्रहरी

पर्यावरण प्रेमी सुखराम चौधरी ने कहा कि पीएचईडी को शहर में जल प्रहरी नियुक्त करने चाहिए, जो शहर में लीकेज चिह्नित करें और फिर विभाग उनकों सुधारे। एक ओर घरों में पानी नहीं आता है और दूसरी ओर सड़कों पर लीकेज से हजारों लीटर पानी व्यर्थ बह जाता है। उन्होंने आईटीआई में प्रशिक्षार्थियों से पौधे लगवाने का सुझाव भी दिया। सामाजिक कार्यकर्ता रामप्रकाश बिशु ने कहा कि शहर में कई होटलों एवं फेक्टरियों में बाल श्रमिक काम कर रहे हैं। पत्रिका को बालश्रम के खिलाफ अभियान चलाकर जिम्मेदारों को चेताना चाहिए।

तालाबों को गंदा नहीं करें

शिक्षक ओमप्रकाश मोकाला ने कहा कि पिछले कुछ समय से नाडी-तालाबों में मूर्तियों का विसर्जन करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है, जो पारम्परिक जल स्रोतों को प्रदूषित कर रही हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए पत्रिका को लोगों को जागरूक करना चाहिए। साथ ही डीजे पर पाबंदी लगे। जागरूक गृहणी निर्मला चौधरी ने कहा कि घर की गंदगी तालाबों में न बहाएं। यदि हम ऐसा करेंगे तो फिर पानी शुद्ध कैसे रहेगा। साथ ही प्लास्टिक का भी उपयोग बंद होना चाहिए। इसके लिए पत्रिका अभियान चलाकर लोगों को जागरूक करें। आईटीआई की प्रशिक्षार्थीभाग्यश्री ने कहा कि जिले के पर्यटन स्थलों का संरक्षण किया जाना चाहिए।

कचरा निस्तारण पर काम हो

डाॅक्टर श्वेता डिडेल ने सुझाव देते हुए कहा कि पत्रिका को ‘बी द चैंज’ के नाम से एक कॉलम चलाना चाहिए, जिसमें समाज सुधार के कार्यों को प्रोत्साहन दिया जाए। साथ ही शहर के कचरा निस्तारण पर काम होना चाहिए। घरों का कचरा कहां डाला जा रहा है, जहां डाला जा रहा है, वहां निस्तारण हो रहा है या नहीं, इस पर ध्यान देने की आवश्यकता है। इसी प्रकार शहर के प्रभुराम गोदारा, सेवानिवृत्त एएसआई रामेश्वर सारस्तव, शिवनाथ सिद्ध आदि ने अपने-अपने सुझाव दिए।