नागौर. सडक़ों पर केवल इलेक्ट्रिक वाहन ही दौड़े तो तो पर्यावरण काफी बेहतर हो जाएगा। इसके चलने से न तो ज्यादा ध्वनि प्रदूषण होगा, और न ही डीजल एवं पेट्रोल के धुओं से पर्यावरण प्रदूषित होगा। इन्हें अच्छी तरह से समझने के बाद भी ऐसे वाहनों की खरीद में सब्सिड़ी देने के अलावा राज्य सरकार की ओर से अन्य कोई महत्वपूर्ण कदम नहीं उठाए गए। इससे े न केवल पर्यावरण बिगड़ा है, बल्कि ऐसे वाहनों की खरीद में दिलचस्पी भी लोगों की नहीं बढ़ी है। पड़ताल में सामने आई मुख्य वजह में पेट्रोल पम्पों की तर्ज पर न तो चार्जिंग स्टेशन की सुविधा होना, और न ही अन्य राज्यों की तर्ज पर इलेक्ट्रिक से पेट्रोल में कनवर्ट करने की योजना प्रदेश में भी चले तो फिर इलेक्ट्रिक वाहनों की खरीद भी बूम आ सकता है।
डीजल-पेट्रोल का बेहतर विकल्प इलेक्ट्रिकल्स व्हीकल
शहर में पिछले दो से तीन सालों में इलेक्ट्रानिक वाहनों की गाडिय़ों की संख्या बढ़ी है, लेकिन औसतन यह संख्या पेट्रोल जनित वाहनों की अपेक्षा कम ही रही है। प्रदूषण के साथ पेट्रोल व डीजल की मंहगी दरों से परेशान लोगों को अब इलेक्ट्रानिक्स वाहनों का विकल्प लुभाने तो लगा है, लेकिन बीच राह तकनीकी गड़बड़ी होने के संशय के साथ ही बैटरी चार्ज खत्म होने पर क्या होगा सरीखे प्रश्नों का डर उनको पेट्रोल या डीजल चलित वाहनों की ओर मोड़ देता है।
चार्जिंग स्टेशन ही नहीं तो फिर कैसे चलें इलेक्ट्रानिक्स गाडिय़ां
शहर एवं इसके आसपास के क्षेत्रों में पेट्रोल पंपों पर अधिकृत रूप से चार्जिंग स्टेशन ही नहीं है। हालांकि बताया जाता है कि कुछ पेट्रोल पम्पों एवं होटल संचालकों की ओर से चार्जिंग प्वाइंट बनाए तो गए हैं, लेकिन इनमें से अब तक किसी को भी एनओसी नहीं मिल पाई है। इसकी वजह से यह चार्जिंग प्वाइंट अब तक सक्रिय नहीं किए जा सके। बताते हैं कि खुद के स्तर पर हालांकि कुछ होटल संचालकों की ओर से इसके प्वांइट्स बनाकर चालू किए गए हैं, लेकिन परिवहन विभाग के अधिकारियों का कहना था कि इस संंबंध में अधिकृत रूप से उनको कोई जानकारी नहीं है।
तकनीकी खराबी के चलते फैला भ्रम
इलेक्ट्रिक वाहनों के वितरकों का कहना है कि पहले ऐसे दोपहिया वाहनों में लेड व लीथियम आयन निर्मित बैटरी आती थी तो इसमें ब्लास्टिंग का खतरा रहता था। इसके चलते तीन से चार साल पहले इस तरह के मामले हुए थे, लेकिन अब लीथिमय फॉस्फेट निर्मित ेबैटरियां आती हैं। यह पूरी तरह से नवीन तकनीकी है। इसमें अब ब्लास्टिंग का खतरा भी नहीं रहता है।
सरकार यह काम करे तो समस्या ही खत्म हो जाए
इलेक्ट्रिक वाहनों से प्रदूषण खत्म होने के सबंध में परिवहन विभाग आए रामजीलाल, हरगोविंद, रमेश, सुमेर सिंह एवं बाबूलाल से बातचीत हुई तो कहा कि इलेक्ट्रिक से पेट्रोल में कनवर्ट करने के अलावा पेट्रोल को इलेक्ट्रिक में कनवर्ट करने की स्कीम सरकार की ओर से लागू हो। इसमें येाजना के तहत सरकारी स्तर पर अनुदान सरीखी सुविधाएं मिले तो फिर लोग शतप्रतिशत इस येाजना का लाभ उठाएंगे। इसके लिए जिलों में सभी जगहों पर अलग से सेंटर खोलने चाहिए। ताकि उस सेंटर में आकर पंजीकरण कराने के साथ अपने वाहनों को कनवर्ट करा सकें। सरकार की ओर से ऐसा प्रयास हो तो फिर निश्चित रूप से प्रदूषण की स्थिति लगभग औसत हो जाएगी।
नागौर परिवहन रेंज एरिया में इलेक्ट्रिकल्स वाहन
वाहन संख्या
ईरिक्शा गुड्स 75
ईरिक्शापैसें. 94
स्कूटर 1438
मोपेड 36
मोटरकार 46
बाईक25सीसी 12
थ्रीव्हीलर गुड्स 8
थ्रीव्हीलर पैसेंजर 19
इनका कहना है…
पिछले कुछ वर्षों में अब इलेक्ट्रिक वाहनों का भी पंजीयन लोग कराने लगे हैं। अब तक जिले में डेढ़ हजार से वाहनों का पंजीयन हुआ है। इसमें सर्वाधिक दो पहिया वाहनों की रही है। व्यवसायिक वाहनों की संख्या ज्यादा नहीं है। चार्जिंग स्टेशनों के संदर्भ में मुख्यालय स्तर से कोई गाइलाइन नहीं है। इस पर कुछ नहीं कह सकता हूं।
अवधेश चौधरी, जिला परिवहन अधिकारी नागौर